मां के नौ रूप


जय हो जय हो नवरात्रि माता।

शैलपुत्री नाम अति सुहाता ।।


पुष्प भावों के नित चढ़ाऊँ,

हे ब्रह्मचारी में तुम को बुलाऊँ।

शीश श्रद्धा से माता झुकाऊं,

हे चंद्र घंटे में तुमको मनाऊँ।

गीत गौरी गजानन के गाऊँ,

आरती नित्य माता सजाऊँ।


मुक्त होता जो द्वारे पे आता।

जय हो जय हो नवरात्रि माता।।


माता कुष्मांडा ज्ञान को भर दो,

कामना भक्त की पूरी कर दो।

स्कंदमाता अरज मेरी सुन लो,

खुशियां बच्चों के जीवन में भर दो।


शांति दर्शन में तेरे ही पाता ।

जय हो जय हो नवरात्रि माता।।


तार से तार मैया मिला दो,

मां कात्यायनी भाग्य जगा दो।

नेह दीपक हृदय में जला दो,

हे कालरात्रि बाधा हटा दो।


सबसे पावन है तेरा हे नाता।

जय हो जय हो मेरी काली माता।।


माता गौरी कल्याण कर दो,

मोह का माँ अँधेरा मिटा दो।

सिद्धिदात्री सफल साधना हो ,

भक्तों की पूरी शुभकामना हो।


भक्त माँ ध्यान तेरा लगाता।

जय हो जय हो नवरात्रि माता।।

शक्ति भक्ति मिले मेरी माता।

मन में स्मरण तेरा ही आता।।


गीता देवी

सहायक अध्यापक

बिधूना, औरैया, उत्तर प्रदेश