दुर्गा माँ


सबको बांँटी है खुशियां तूने,

दिल किसी का दुखाया नहीं।

मांँ तेरी नजरों में कोई अपना पराया नहीं ,

मेरे मन ने भी हिम्मत न हारी।

पांँव भी डगमगाए नहीं ,

 हम भुला देते हैं तुझको लेकिन,

तूने हमको भुलाया नहीं ।

सबको बांंटीहै खुशियां तूने,

 कोई अपना पराया नहीं है।

 मुस्कुराहटों में छुपी तेरी रोशनी ,

 चांँद तारे रोशन तेरी रोशनी से ।

 छुप गई है पहाड़ों पर लेकिन,

 रूप अपना छुपाया नहीं है।

 तेरे दरियादिली की क्या कहानी,

  हमसे दोराही जाएँ कहीं ना।

  कौन सा वो खजाना है मैया,

  हँस के लुटाया नहीं है।

  वो तेरी सूरत तेरा भवन माता,

   लाखो ओझल हो नजरों से मेरी।

   ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर का जलवा मैया ,

   तूने छुपाया नहीं है ।

   तेरी कृपा से फूले जग सारा,

   तेरी रहमत की कोई कमी ना।

   सब को बांँटी हैं खुशियां तूने,

   दिल किसी का दुखाया नहीं।

   तेरे दर पर जो भी आया

   खाली ना यहांँ से जाए 

   मुरादो को पूरा करने वाली

   भक्त तेरा ही गुण गाए 

   तेरा ही जयकारे लगाए 

   जय हो सचियांँ जोता वाली 

    जय हो ऊंचे पहाड़ा वाली।।

             रचनाकार ✍️

              मधु अरोरा