मेरी मांँ

    बंद किस्मत के ताले की चाबी है,

    सूखे पेड़ों पर लाने वाली हरियाली हो।

     हर दीन दुखियों की मुराद पूरी करने वाली ,

     अंधे को आंख कोड़ी को काया ।

     मां तू  प्यार भरा साया है ।

     जिसके दर से न खाली कोई आया ,

     ममता का अद्भुतखजाना है ।

     तेरी महिमा का पार नहीं जाना है,

     मन तेरा कितना कोमल सरल

     माता जानता यह संसार सारा है ।

    तूने उसकी ही बिगड़ी बनाई ,

     मन से जिसने तुझे पुकारा है।

     तेरे अद्भुत रूप का देखा,

     भक्तों ने अजब नजारा है ।

     बन गई कहीं तू शेरावाली ,

     कहीं रूप चंडी का धारा है।

      फूल जंगल में तूने खिलाए,

      रंग शक्ति से अपनी दिखाएं।

      तू उतर आई जब भी दया पर,

      स्वर्ग धरती पर तूने उतारा ।

     जाने क्यों तेरे हृदय में माता ,

     ममता का समंदर  भरा है।

     आ गया जो भी शरण में तेरी,

      बन गया तेरीआंखों का नूर ।

      बंद किस्मत के ताले की चाबी है।

       तू सूखे पेड़ों पर लाने वाली हरियाली।

       मन की मुरझाई कली खिलेगी,

       जोत उम्मीद  की फिर जलेगी।

        दरस तेरा नैनो को जब मिलेगा ,  

        लौ लगा शेरावाली से अपनी।

        फिर ना कोई मारा मारा फिरेगा ,

        बहारो में नजारे मिलते जाएंगे 

        मांँ की दया से मन के तुम्हारी।

        कलियां नित नई खिलती जाएंगी,

        मोह ले जो मैया के मन को,

        ऐसा करते व्यवहार चलो ।

       जीवन की सुनी बगिया में

       हरियाली लानेवाले है मांँ मेरी

       मैया की भक्ति है जग में

       खुशियां बढ़ाने वाली

       फूल लिए हाथों में 

       मन में लेकर सच्चा प्यार 

        मांँ की चरणों में अर्पणकरते चलो 

        बंद किस्मत के ताले की चाबी है 

        सोई किस्मत जगाने वाली है 

        जीवन में खुशहाली लाने वाली है

        ऐसी माँ मेरी पहाड़ां वाली है।

        

                         रचनाकार ✍️

                         मधु अरोरा