मर्यादा पुरुषोत्तम ने भारत की ऋषि एवं ज्ञान परम्परा को विकसित करने का कार्य किया: योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में विजयदशमी के अवसर पर आयोजित समारोह में कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं प्रदेश सरकार के नेतृत्व में नये भारत का नया उत्तर प्रदेश बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की सांस्कृतिक विरासत एवं ऐतिहासिक स्थलों को अक्षुण्ण रखने का कार्य कर रही है। पर्यटन विकास की विभिन्न परियोजनाएं पूरे प्रदेश में क्रियान्वित करायी जा रही हैं। प्रदेश सरकार बिना भेदभाव के समाज के सभी लोगों के कल्याण के लिए निरन्तर प्रयत्नशील है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काशी में बाबा विश्वनाथ धाम एक नये स्वरूप में विकसित हो रहा है। मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। प्रयागराज के दिव्य एवं भव्य कुम्भ को पूरी दुनिया ने देखा है और उसकी स्वच्छता, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था की सराहना की है। नमामि गंगे परियोजना द्वारा गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाया जा रहा है। यह सभी हमारे गौरव के प्रतीक हैं। नये भारत का नया उत्तर प्रदेश अपने सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए पूरी दृढ़ प्रतिज्ञा के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश एवं देशवासियों को विजयादशमी की बधाई देते हुए कहा कि देश सहित पूरे विश्व में भारतीय परम्परा से जुड़े लोग विजयादशमी पर्व को हर्ष एवं उल्लास से मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रखरता से प्रस्तुत किया जा रहा है। वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम का भव्य मन्दिर का निर्माण प्रारम्भ हो चुका है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को देश व प्रदेश में पूरी तरह नियंत्रित किया जा चुका है। कोरोना काल खण्ड में पूरी दुनिया ने भारत की आयुष पद्धति को अपनाया एवं स्वीकार किया है। इस महामारी में अनेक लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। प्रदेश सरकार की संवेदना शोक संतप्त परिजनों के साथ है। मुख्यमंत्री ने सभी से भगवान श्रीराम के जीवन-दर्शन को अपनाने और सदैव सत्य एवं धर्म की राह पर चलने की अपेक्षा की। गोरक्षपीठ अपने ऐतिहासिक क्रम से ही मानसरोवर मन्दिर में पूजन-अर्चन एवं रामलीला का आयोजन करता आ रहा है। सत्य एवं धर्म का मार्ग हमें सदैव अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के चरित्र से धर्म के सभी गुण दृष्टिगोचर होते हैं। हमें केवल विचारों से ही नहीं, बल्कि आचरण से भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के गुणों को अंगीकार करने का प्रयास करना होगा। श्रीराम की कार्यशैली में सर्वसमावेश की भावना दृष्टिगोचर होती है। उन्होंने कभी महिला-पुरुष में भेद नहीं किया। मर्यादा पुरुषोत्तम ने भारत की ऋषि एवं ज्ञान परम्परा को विकसित करने का कार्य किया साथ ही, भारत की सांस्कृतिक इकाई को एकीकृत किया था।