लखीमपुर कांडः फूंक-फूंककर कदम रख रही बीजेपी, विपक्षी हमलावर फिर भी चुप

लखनऊ। लखीमपुर खीरी कांड ने सियासी पारा काफी गर्म कर दिया है।विपक्ष बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ने वाला है। लखीमपुर खीरी की घटना की राजनीतिक तासीर को समझते हुए भाजपा नेतृत्व  मामले पर पूरी सतर्कता बरत रहा है। किसान नेताओं से लेकर राजनीतिक दलों के ताबड़तोड़ हमलों के बावजूद पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पूरे मामले को प्रदेश स्तर पर ही सुलझाया जा रहा है। इस बीच केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले पर सांसद वरुण गांधी की प्रतिक्रिया का भी संज्ञान लिया है।उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों की चुनावी तैयारियों और किसान आंदोलन की तपिश के बीच घटी लखीमपुर खीरी की घटना से भाजपा की चिंताएं बढ़ी हुई है। इसका असर उत्तर प्रदेश ही नहीं, उत्तराखंड व पंजाब तक पड़ सकता है। ऐसे में राजनीतिक हमलों को झेलते हुए भी मामले को ठंड़ा करने की रणनीति पर चला जा रहा है। केंद्र सरकार से लेकर पार्टी में केंद्रीय स्तर पर इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र चूंकि मामले में उनके बेटे का नाम है, खुद ही सफाई दे रहे हैं। भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 घंटे के भीतर नाराज किसानों के साथ समझौता कर पीड़ितों को मुआवजा व परिजनों को सरकारी नौकरी का वादा कर गुस्सा व नाराजगी कम कर लिया है। यह मामला किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत की मौजूदगी में सुलझा है इसलिए इस पर किसानों के तेवर अब उतने तीखे नहीं रहेंगे। रही बात राजनीतिक दलों के आरोपों की तो भाजपा बाद में निपटेगी अभी मौन ही सही है। चुनावी जमीन पर खड़े उत्तर प्रदेश में यह घटना विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है। भाजपा नहीं चाहती है कि घटना का लाभ विपक्ष उठाए और वह कठघरे में खड़ी रहे। विपक्ष के तेवर गरम रहेंगे और आरोप अभी लगते रहेंगे, लेकिन नाराज किसानों का गुस्सा ठंड़ा पड़ने के बाद उनका असर ज्यादा नहीं होगा। अगर कुछ असर पड़ता दिखा तो भाजपा और भी फैसले ले सकती है। पूरे मामले पर केंद्र की तरफ से फिलहाल किसी तरह की बयानबाजी न करने को कहा है।  इस बीच सांसद वरुण गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर मृतक किसानों को एक करोड़ रुपये मुआवजा व सीबीआई जांच की मांग की है। बताते हैं कि इसके बाद भाजपा के एक केंद्रीय पदाधिकारी ने इस मामले पर उनसे बात की है और इस तरह के पत्र न लिखने की सलाह दी है। वरूण गांधी की किसानों की हमदर्दी आज कोई नई बात नहीं है, वे हमेशा किसानों को अन्नदाता ही कहते हैं और उनके हक को लेकर मुखर रहते हैं।