राजस्थान, झारखंड और महाराष्ट्र में मानवाधिकार का हनन राहुल-प्रियंका को नहीं दिखता, भाजपा का जोरदार हमला

नई दिल्ली : मानवाधिकार के हनन के मामले को लेकर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला किया. उन्होंने कहा कि कुछ देर पहले हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 28वें स्थापना दिवस पर सुना है. प्रधानमंत्री जी ने बड़ी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ पूरे विषय को रखने का काम किया. प्रधानमंत्री ने कहा है कि मानवाधिकार का बहुत ज्यादा हनन तब होता है जब उसे राजनीतिक रंग से देखा जाता है, राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, राजनीतिक नफा-नुकसान के तराजू से तौला जाता है. इस तरह का सलेक्टिव व्यवहार, लोकतंत्र के लिए भी उतना ही नुकसानदायक होता है.पात्रा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि आप देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में किस प्रकार की राजनीति करने की कोशिश हो रही है. भाजपा ने बार-बार कहा है और आज फिर मैं कह रहा हूं कि लखीमपुर खीरी में जो हुआ है वो पूर्णतः दुःखद है और उस पूरे विषय की निष्पक्ष जांच चल रही है. लेकिन दुःखद है कि जिस प्रकार की राजनीति कुछ राजनीतिक दल कर रहे हैं और वोट की खेती करने का प्रयास कर रहे हैं. खासतौर से गांधी परिवार, प्रियंका जी और राहुल गांधी अपने आप को चौंपियन ऑफ दलित राइट के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं. आगे भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजस्थान में मानवाधिकार का हनन गांधी परिवार को नजर नहीं आता है. राजस्थान के प्रेमपुरा गांव में कुछ दिन पहले एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. उसके बाद उसके मृत शरीर को उसके घर के सामने फेंक दिया गया. लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव या बंगाल का कोई नेता वहां नहीं पहुंचे. इस घटना का वीडियो भी बनाया गया. यहां दलितों के समर्थन में किसी ने आवाज नहीं उठाई. क्या दलित को जीने का अधिकार नहीं है.

संबित पात्रा ने कहा कि राजस्थान का प्रशासन दलित उत्पीडन पर चुप क्यों है. राजस्थान की घटना की चर्चा तक नहीं की जाती है. कोई इसपर प्रतिक्रिया नहीं देता है. राहुल गांधी का ट्वीट भी इन घटनाओं पर नहीं आता है. झारखंड और महाराष्घ्ट्र की घटनाओं का जिक्र करते हुए पात्रा ने कहा कि यहां कांग्रेस के समर्थन से सरकार चल रही है. इन राज्यों में महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार कांग्रेस को नहीं नजर आ रहे हैं. वहां भी सब चुप बैठ जाते हैं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इसपर प्रतिक्रिया तक नहीं देते हैं. ये लोग दूसरे राज्यों में जाकर मानवाधिकार की बात करते हैं. प्रियंका गांधी तो महिला हैं. उन्हें महिलाओं का दर्द समझना चाहिए.