सबको शुद्ध विचार दे माँ

ओ माँ मेरी आज प्यार से,

वीणा को झंकार दें,

छन्द निबन्ध प्रबन्धों वाला,

वाणी को श्रृंगार दें।

ऐसी ज्योति जगा दे उर में,

जन जन का उद्धार हो,

गंगाजल की पावनता का,

रग रग में संचार हो,

चारों वेद कंठ पर बैठे,

वीणा के वरदान से,

पूनम वाला चाँद चाँदनी,

बांटे यश के गान से,

शब्द शब्द हो अक्षत चन्दन,

अरि दल को अंगार दे।

हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई,

सब भारत में एक है,

सब ही तेरे पूत शारदा,

सब नीयत के नेक है,

सबका कर कल्याण आज तू,

सबको शुद्ध विचार दें।

छन्द निबन्ध प्रबंधों वाला,

वाणी को श्रृंगार दे।


सीमा मिश्रा,बिन्दकी,फतेहपुर