निर्भर करता मानव पर

टिक टिक घड़ी चलती जाती है

वह निरंतर हमें समय बताती है

टिक टिक करना उसका काम नहीं है

आगे बढ़ते रहना उसका  काम यही है

घड़ी में होती सुईयां छोटी बड़ी

मिलकर काम करें सुईयां छोटी बड़ी

घड़ी की सुईयां संदेशा दे जाती हैँ

मिलकर रहो सुईयां कह जाती हैँ

सेकंड की सुईयां हमें बताती हैँ

कमजोर वस्तु भी काम आती है

घड़ी का महत्व जिसने सीखा है

उसने जीवन पथ पर चलना सीखा है

घड़ी को अनदेखा करना सही नहीं है

घड़ी को सुनकर चलना सही यही है

जब भी कुछ अच्छा नहीं होता है

इंसान घड़ी को क्यों दोष देता है

घड़ी तो बस चलती ही रहती है

अपनी मस्ती में  ही मस्त रहती है

घड़ी नहीं कहती है कभी कि

तुम चलो उसके ही इशारे पर

जीवन सफल बनाने को

निर्भर करता है सब मानव पर

रितु शर्मा

दिल्ली