दवा की दुकान पर चर्चा

दवाई की दुकान से अपनी आजीविका चलाने वाले समाजसेवी व व्यवसायी श्री अभिषेक जैन जी से चर्चा के दौरान कुछ सामान्य से लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न जो कोरोना काल से लेकर अब तक के हैं जिन पर आमजन तथा बुद्धिजीवी वर्ग विचार विमर्श करते हैं। तो हमने सोचा क्यों ना इन सवालों के जवाब अभिषेक जैन जी से मालूम करें जायें। इसी सिलसिले मैं हमने अभिषेक जैन जी से सवाल करे और सिलसिलेवार उनके द्वारा जवाब दिये गये।

प्रश्न-अभी बरसात का मौसम है और इस मौसम में होने वाली बिमारियों के चलते सामान्यतया किस किस्म की बिमारियों के मरीज आपकी दुकान पर आते हैं।

अभिषेक जैन - इस समय मुख्य रूप से सर्दी, खांसी, बुखार,हाथ- पैरों में दर्द, शरीर में थकावट महसूस होना इसके अतिरिक्त चूंकि मौसम बरसात का है और वातावरण में नमी की अधिकता के चलते कभी-कभी कपड़े पूर्ण रूप से सूख नहीं पाते हैं और उनमें नमी का कुछ अंश रह जाता है।जिसमें की विषेश रूप से अंतःवस्त्रों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा । अंतः मुख्य रूप से अंतः वस्त्रों में विद्यमान नमी या गीलेपन के कारण शरीर के छुपे हुए अंगों में रेशेसे,बारीक- बारीक फुंसीया हो जाना तथा उनमें खुजली महसूस होना इसके साथ ही यदि ध्यान नहीं दिया जाए तो संक्रमण फैल कर अंदरूनी हिस्सों तक भी चला जाता है।

प्रश्न- बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श पत्र अर्थात, डॉक्टर द्वारा लिखित पर्चे के बगैर दवाई खरीदने आने वाले ग्राहकों के विषय में आपके क्या विचार हैं।.

अभिषेक जैन - आजकल अधिकांश लोग डॉक्टर द्वारा लिखी गर्ई विभिन्न जांचों एवं डॉक्टर की फीस से बचना चाहते हैं। क्योंकि इस महंगाई के दौर में ग्राहक कुछ खर्चे कम कर कुछ पैसा बचाना चाहता है।

प्रश्न- कोरोना काल से लेकर अब तक ग्राहकों और दुकानदार के मध्य कोरोना नियमों का पालन किस तरह से हो रहा है।

अभिषेक जैन - कोरोना काल से लेकर अभी तक ग्राहक और दुकानदार दोनों ही मास्क और सेनीटाइजर का उपयोग कर रहे हैं। दुकानदार ग्राहक के जाने के बाद अपने हाथों को सेनीटाइज करते हैं वहीं बहुत सारे ग्राहक  व्यक्तिगत सेनीटाइजर स्तेमाल करते हैं।

प्रश्न - प्रतिबंधित दवाओं के बारे में आपके क्या विचार हैं। और कुछ मुख्य प्रतिबंधित दवाओं के नाम भी बताईये ताकी आम व्यक्ति इनके बारे में जागरूक हो सकें। 

अभिषेक जैन- सरकार द्वारा प्रतिबंधित दवाओं को कोई भी मेडिकल स्टोर संचालित करने वाला दुकानदार नहीं बेचता है। ज्यादातर ग्राहक नींद की दवाई,गर्भनिरोधक गोलियां लेने के लिये आतें हैं। इस तरह की प्रतिबंधित दवाईयां मांगने वाले ग्राहकों को हम चिकित्सक अथवा मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह देते हैं।

प्रश्न - कितने साल से आप इस व्यवसाय को संचालित कर रहें हैं।

अभिषेक जैन- इस व्यवसाय को संचालित करते हुये मुझे दस वर्ष हो गये हैं।

प्रश्न - सरकार सें आपको किस तरह के सहयोग की अपेक्षा है।

अभिषेक जैन- पूर्ण तालाबंदी के दौरान जब सब कुछ बंद था उस समय मेडिकल स्टोर खुले हुए थे और जैसी सेवा उस समय ग्राहकों को दी जा रही थी वैसी ही सेवा अभी भी ग्राहकों को दी जा रही है।और इस बीच हमने अपने बहुत सारे साथियों को खोया है। सरकार से हमारी अपेक्षा है कि मेडिकल व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों का उचित सम्मान एवं इस व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों की समस्याओं को सुन समझ कर उनका त्वरित निराकरण करा जाये।

प्रश्न - जिन दवाईयों की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है उनका आप क्या करते हैं।

अभिषेक जैन - जिन दवाईयों की समय-सीमा समाप्त हो जाती है उन्हें हम कंपनी से बदलने का प्रयास करते हैं। लेकिन कभी-कभी दवाईयां किसी कारण से कंपनी को वापस नहीं हो पाती है तब छोटे दुकानदारों के लिए यह एक बड़ा नुकसान होता है।

प्रश्न - आपकी दवाई की दुकान पर आने वाले ग्राहकों को आप क्या संदेश देना चाहते हैं।

अभिषेक जैन- अक्सर डिस्काउंट के चक्कर में ग्राहक ऑनलाईन प्रोडक्ट मंगवाना पसंद करते हैं लेकिन ग्राहकों को हमेशा यह बात अपनी स्मृति में रखना चाहिये कि जब कोरोना अपने चरमोत्कर्ष पर था तब आपके पड़ोस का का मेडिकल वाला अपनी जान को जोखिम में डाल कर आपकी सेवा में लगा हुआ था।और सभी ऑनलाईन वाले अपनी दुकान बंद करके बैठे हुए थे। विभिन्न समाचार पत्रों एवं न्यूज चैनलों के माध्यम से पता चला है कि डिस्काउंट के चक्कर में ऑनलाइन कंपनियां नकली दवाईयां सप्लाई कर रहीं हैं। यहां तक की कई बार बिना जांचे परखे निर्धारित तिथि समाप्त हो जाने के पश्चात्‌ भी ग्राहक को दवाईयां भेज दी जाती हैं। इसलिये थोड़े से डिस्काउंट के लालच में ना आकर अपने पड़ोस के दुकानदार से ही दवाईयां लेना चाहिये।क्योंकि अगर कोई दिक्कत आती है तब आप संबंधित केमिस्ट की दुकान पर जाकर दवाईयां वापस कर सकते हैं या बदल सकते हैं।इस तरह से छोटे बड़े आसपास के दुकानदारों की रोजी रोटी भी चलती है और दुकानदार तथा आपके मध्य एक भौतिक रिश्ता भी कायम रहता है। जो मुसीबत में तुरंत परिणाम देता है।

प्रश्न - विभिन्न डॉक्टरों द्वारा लिखे गये पर्चे या चिकित्सकों द्वारा लिखे जाने वाले परामर्श पत्र की लिखावट समझ कर ग्राहकों को दवाईयां देना आपके लिये रूटीन कार्य है लेकिन क्या कभी किसी डॉक्टर की लिखावट या हैंड राइटिंग समझ में नहीं आने पर आप के द्वारा डॉक्टर को फोन कर के पूछा गया है।

अभिषेक जैन - कभी-कभी डॉक्टर से भी फोन पर बात करना पड़ती है।ऐसी स्थिति में मरीज से बिमारी के बारे में पूछताछ करने के बाद समझ जाते हैं कि डॉक्टर नें कौन सी दवाई लिखी है। दिन भर दवाई बेचने के कारण अनुभव हो ही जाता है और अनुभव बहुत काम आता है। मुझे अभी तक इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।

प्रश्न - अक्सर डॉक्टर अपने क्लीनिक या अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध दवाएं ही लिखते हैं।क्या कारण है। 

अभिषेक जैन - अक्सर डॉक्टर ऐसी कंपनीयों की दवाई लिखते हैं जो उसके बगल या पास वाले मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है। और डॉक्टर मरीज से कहता है कि पास वाली दुकान से दवाई ले लो। और कई बार उस समय पैसे कि उपलब्धता ना होना या अन्य किसी कारण से मरीज वहां से दवाई नहीं खरीद पाता हैं तब वह अपने घर के पास वाले मेडिकल स्टोर पर दवाई लेने जाता है उस समय उसे समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि यह दवाई हमारे पास नहीं है आपको वहीं के मेडिकल स्टोर से लेना पड़ेगी जहां आपने डॉक्टर को दिखाया था।

प्रश्न - कुछ ऐसी दवाईयां महिलाओें एवं महिला पुरुष से संबंधित प्रोडक्ट जिन्हें महिलायें मेडिकल स्टोर पर लेने आने में शर्म एवं संकोच का अनुभव करती हैं। तब क्या वह पहले के ही समान अब भी परिवार के पुरुष सदस्यों अथवा अपने किसी पुरुष मित्र के माध्यम से मंगवाती हैं या स्वयं मेडिकल शॉप पर आकर लेकर जाती हैं।

अभिषेक जैन - टीवी और इंटरनेट से फैली जागरूकता एवं कामकाज तथा पढ़ाई लिखाई के सिलसिले में घर से बाहर निकलने के कारण आजकल हमारा अधिकांश महिलावर्ग संकोच और शर्म के दायरे से बाहर निकल रहा है। अतः महिलायें शर्म और संकोच के दायरे से बाहर निकल अपनी वाणी तथा विचारों में स्पष्टता रखते हुये निःसंकोच जरूरत अनुसार दवाएं तथा अन्य प्रोडक्ट खरीदने मेडिकल शॉप पर आ रही हैं।

रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार 

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