भविष्य हुआ लाचार

आज लगाऊँ मैं हुँकार ।

देखो भविष्य हुआ लाचार।।


बच्चे हैं कल का भविष्य ,

नहीं मिली इन्हें पतवार ।

नैया डूब रही किनारे पर ही,

देखो भविष्य हुआ लाचार ।।


कलम मिली नहीं हाथों को,

ज्ञान  पड़ा  देखो मझधार ।

नन्हे करतलों से बोझा खींचे,

देखो भविष्य हुआ लाचार।।


है उम्र तात के कंधों पर बैठूँ,

पलकों पर बिठाए घर बार ।

पर सिर पर जिम्मेदारी भारी,

देखो भविष्य हुआ लाचार ।।


नहीं बने खिलौने संगी साथी,

हो गई बचपन से तकरार ।

मजबूर हो गया पेट की खातिर,

देखो भविष्य हुआ लाचार ।।


थी हसरत माँ की गोद में बैठ,

उनके हाथों से खाऊं बार-बार।

घर का सहारा बना मासूम ,

देखो भविष्य हुआ लाचार ।।


आओ मिलकर हम मासूमों की,

नैया लगाएँ ज्ञान  के  पार ।

हो भविष्य उज्जवल इनका ,

न रहे अब भविष्य लाचार।।


गीता देवी

औरैया, उत्तर प्रदेश