संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफल संचालन हेतु अन्तर्विभागीय बैठक सम्पन्न

बहराइच। जनपद में संचारी रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए 18 अक्टूबर से 17 नवम्बर 2021 तक संचालित होने वाले अभियान के सफल संचालन के उद्देश्य से बुधवार को देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित अन्तर्विभागीय समन्वय बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र ने निर्देश दिया कि शासन द्वारा सभी विभागों के लिए अलग-अलग उत्तरदायित्व निर्धारित किये गये हैं। शासन द्वारा निर्धारित उत्तरदायित्व के अनुसार तैयार की गयी कार्ययोजना के अनुसार अभियान के दौरान संचालित होने वाले विभिन्न गतिविधियों की तैयारी समय से सुनिश्चित कराये। जिलाधिकारी श्री सिंह ने यह भी निर्देश दिया कि नियमित टीकाकरण के साथ-साथ कोविड टीकाकरण भी पूर्व की भांति प्रभावी ढंग से संचालित किया जाय। अभियान के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग संचारी रोगों तथा दिमागी बुखार से सम्बन्धित रोकथाम एवं नियंत्रण गतिविधियों हेतु जनपद, ब्लाक तथा पंचायत/ग्राम स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय हेतु नोडल विभाग का कार्य करेगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग संचारी रोगों तथा दिमागी बुखार केसेज की निगरानी सर्विलेंस, फं्रट लाइन वर्कर्स द्वारा उपलब्ध करायी गयी लक्ष्ण युक्त व्यक्तियों की सूची में उल्लिखित रोगियों की लक्षण के अनुसार संचारी रोगों, कोविड संक्रमण तथा क्षय रोग हेतु जांच व रोगियों के उपचार की व्यवस्था, रोगियों के निःशुल्क परिवहन हेेतु रोगी वाहन की व्यवस्था के साथ-साथ वाहक नियंत्रण गतिविधियों अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में वाहक के घनत्व का आकलन, स्त्रोतों में कमी, लार्वारोधी गतिविधियां तथा आवश्यकतानुसार फॉगिंग, प्रचार-प्रसार एवं व्यवहार परिवर्तन गतिविधियां, मॉनिटरिंग, पर्यवेक्षण, रिपोर्टिग, अभिलेखीकरण तथा विश्लेषण की कार्रवाई करेगा।

नगरीय विकास विभाग अन्तर्गत नगरीय निकायों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचारी रोगों की रोकथाम तथा साफ सफाई के सम्बन्ध में संवेदीकरण, नगरीय क्षेत्र में मोहल्ला निगरानी समितियों के माध्यम से कोविड तथा संचारी रोगों के विषय में निरन्तर जागरूक करने तथा कोविड रोग के लक्षण युक्त व्यक्तियों को मेडिसिन उपलब्ध कराने में सहयोग, नगरीय क्षेत्रों में वातावरणीय तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के उपायों, खुले में शौच न करने, शुद्ध पेयजल के प्रयोग तथा मच्छरों की रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान, खुली नालियों को ढकने की व्यवस्था, नालियों/कचरों की सफाई, फागिंग इत्यादि की कार्यवाही की जायेगी।

इसके अलावा नगरीय विकास विभाग का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि उथले हैण्डपम्पों का प्रयोग रोकने के लिए उन्हें लाल रंग के चिन्हित करना, हैण्डपम्पों के पाइप को चारों ओर से कंकरीट से बन्द करना, हैण्डपम्पों के पास अपशिष्ट जल के निकलने हेतु सोक-पिट का निर्माण, शुद्ध पेयजल की गुणवत्ता के अनुश्रवण के लिए बैक्टीरियोलाजिकल/वायरोलाजिकल जांच, आबादी में मिनी पब्लिक वाटर सप्लाई एमपीडब्ल्यूएस टैंक टाईप स्टैण्ड पोस्ट टीटीएसपी की मानकों के अनुसार स्थापना एवं अनुरक्षण, जल भराव तथा वनस्पतियों की वृद्धि को रोकने के लिए सड़कों तथा पेवमेन्ट का निर्माण, सड़को के किनारे उगी वनस्पतियांे को नियमित रूप से हटाने, शहरी क्षेत्रों एवं शहरी मलिन बस्तियों के संवेदनशील आबादी समूहों में अपनी गतिविधियों को केन्द्रित करने, संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर खुले में शौच से मुक्त ओडीएफ करना शामिल है।

पंचायती राज/ग्राम्य विकास विभाग अन्तर्गत संचालित गतिविधियों एवं जनसम्पर्क एवं जनजागरण के लिए ग्राम प्रधान अपने ग्राम के नोडल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों गठित ग्राम निगरानी समितियॉ कोविड तथा संचारी रोगों के विषय में निरन्तर जागरूकता अभियान चलाने तथा कोविड रोग के लक्षण युक्त व्यक्तियों को मेडिसिन उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगी। ग्राम स्तर पर साफ-सफाई, हाथ धोना, शौचालय की सफाई तथा घर से जल निकासी हेतु जन जागरण के साथ-साथ वी.एच.एस.एन.सी. के माध्यम से संचारी रोगों तथा दिमागी बुखार के रोकथाम हेतु ‘‘क्या करें, क्या न करें’’ के सम्बन्ध में प्रचार-प्रसार भी करेंगी।

शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के तहत उथले हैण्डपम्प को लाल रंग से चिन्हित कर जनता को उनका प्रयोग न करने के लिए जागरूक करना, खराब इण्डिया मार्क-2 हैण्डपम्पों की मरम्मत एवं निरन्तर क्रियाशील रखने एवं उसके चारों ओर पक्का चबूतरा बनवाने, सामुदायिक वाटर फिल्टर्स, माइक्रोफाइनेन्स योजना के तहत व्यक्तिगत वाटर फिल्टर्स तथा वाटर पम्पयुक्त टैंक टाइप स्टेण्ड पोस्ट की स्थापना के साथ-साथ पेयजल सोत्रों/संसाधनों से शौचालय की दूरी के उपाय, शौचालयों/सीवर से पेयजल प्रदूषित न होने देने के लिए आवश्यक उपाय।

वेक्टर कन्ट्रोल हेतु जलाशयों एवं नालियों की नियमित सफाई, ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा फण्ड से फागिंग की व्यवस्था, अपशिष्ट/रूके हुए पानी तथा मच्छरों के प्रजनन की समस्याओं को रोकने के लिए गड्डों का भराव तथा मकानों के बीच कंकरीट अथवा पक्की ईटों वाली सड़कों का निर्माण, झाड़ियों को कटवाना तथा अन्य कृंतक नियन्त्रण उपाय के साथ-साथ जलाशयों एवं तालाबों से हाईसिन्स के पौधों की सफाई की कार्यवाही की जायेगी। इसी प्रकार वातावरणीय स्वच्छता के लिए जल निकासी एवं साफ-सफाई, वाटर सील्ड शौचालयों की तथा ग्राम स्तर पर कचरा निस्तारण एवं प्रबन्धन व्यवस्था का विकास, संक्रमण तथा जल संदूषण की उत्तरदायी खुली नालियों को ढकना, संवेदनशील ग्रामों में स्वच्छ भारत के अभियान अन्तर्गत ग्रामों में प्रत्येक मकान में शौचालय का निर्माण कर ग्रामों को खुले में शौच से मुक्त बनाने, ग्रामों में कूड़ेदानों की स्थापना में सहयोग तथा ग्राम स्तर पर ऐच्छिक स्वास्थ्य प्रेरक चिन्हित कर ग्राम वासियों के मार्गदर्शन हेतु इनका स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जायेगा।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कविता मीना, डीपीएमएनएचएम सरयू खां, अधि. अभि. विद्युत मुकेश बाबू, जिला विद्यालय निरीक्षक चन्द्रपाल, जिला पूर्ति अधिकारी अनन्त प्रताप सिंह, डीपीआरओ उमाकान्त पाण्डेय, ईओ नगर पालिका दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जयन्त कुमार, डा. अजीत चन्द्रा, प्रभारी चिकित्साधिकारीगण व अन्य सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।