बरकत नहीं आज धंधे में

बरकत नहीं है आज धंधे में

चल रही  गाड़ी अभी मंदे में


बुराइयों का बोलबाला आज

लटक रहीअच्छाईयां फंदे में


सरगर्मी तेज कैसे चुनावों की

मांग रहे  मत ,दो हमें  चंदे में


कायापलट हो  किसके हाथों 

कब अक्श दीखे,किस बंदे में


अमलचूल की बाते है फिजूल

खेलने में मशगूल बच्चे गंदे में


राजेंद्र कुमार सिंह

ईमेल: rajendrakumarsingh4@gmail.com