सौर ऊर्जा को लेकर अब नया संकट, पड़ेगी महंगाई की मार

नई दिल्ली। कच्चे तेल, गैस और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन की कीमतों में उछाल आने के बाद अब नया संकट सौर ऊर्जा को लेकर हो गया है। चीन में बिजली संकट गहराने के बाद भारतीय सौर परियोजनाओं के लिए सोलर मॉड्यूल की कीमतें 28 सेंट प्रति किलोवाट-घंटे के उच्च स्तर को छू रही हैं। यह 2019 के बाद से सबसे अधिक है। यानी आने वाले दिनों में सौर ऊर्जा भी महंगा होने की पूरी आशंका है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल चीन की अब तक की सबसे गंभीर बिजली संकट के कारण आया है, जिसमें कारखाने सीमित दिनों में चल रहे हैं। सौर ऊर्जा परियोजना की कुल लागत का लगभग 60% मॉड्यूल में निवेश होता है। ऐसे में मॉड्यूल की कीमत में वृद्धि परियोजनाओं की लागत बढ़ाने का काम करेगी। इससे सौर ऊर्जा की भी लागत बढ़ेगी, जिसका भुगतान अंत में उपभोक्ताओं को करना होगा। इस घटनाक्रम से जुड़े एक लोग ने बताया कि चीन में बिजली संकट गहराने के बाद चीनी कंपनियां सोलर मॉड्यूल की डिलिवरी नहीं कर पा रही हैं। सौर पैनल कंपनियों के पास 31 मार्च 2022 तक भारतीय कंपनियों का लगभग 5 गीगावाट की आपूर्ति लंबित है।

सोलर इक्विपमेंट बाजार में चीन की 78% हिस्सेदारी है। बाकी वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड और हांगकांग के पास है। सोलर सेल और मॉड्यूल का आयात पिछले वित्त वर्ष में घटकर 57.165 करोड़ डॉलर रह गया था जो 2018-19 में 2.16 अरब डॉलर और 2019-20 में 1.68 अरब डॉलर था। वहीं, दूसरी ओर सरकार आर्थिक रणनीति के तहत 1 अप्रैल 2022 से आयातित सोलर सेल, मॉड्यूल और इनवर्टनर पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी लगा रही है। इससे भी कीमत और बढ़ेगी।

एक कंपनी के अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, समुद्र के रास्ते माल ढुलाई में रुकावट आने से भाड़ा चार गुना हो गया है। इसके अलावा कंटेनर का अभाव हो गया है और अब नोटिस आ रहे हैं। इन सबके चलते चौतरफा समस्याएं पैदा हुई हैं। इससे सोलर पैनल के आयात करने वाले आयातकों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। गौरतलब है कि हाल के दिनों में महंगी बिजली का विकल्प बन रही थी सौर ऊर्जा।

देश के शीर्ष 10 शहरों में ज्यादातर परिवार (करीब 60 प्रतिशत) त्योहारी सीजन में खर्च कर रहे हैं, लेकिन पेट्रोल और डीजल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से वे अपने बजट या मूल्य को लेकर सचेत हैं। कलसर्किल्स ने अपने सर्वेक्षण में यह जानकारी दी है। सर्वेक्षण में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे, गुरुग्राम और नोएडा को शामिल किया गया था।