सरजू घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर ग्रामीणों में मची हलचल

करनैलगंज/गोंडा । सरयू (घाघरा) की बाढ़ अपना रौद्र रूप दिखा रही है। अक्टूबर माह में आने वाली यह पहली बाढ़ को पहली बार ग्रामीण देख रहे हैं। बाढ़ लगातार वीभत्स रूप अख्तियार करती जा रही है। शुक्रवार को सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। वहीं विभिन्न बैराजों से करीब 5 लाख 88 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। जो डिसचार्ज हो रहा था। शुक्रवार का कुल डिस्चार्ज 4 लाख 67 हजार क्यूसेक था। बाढ़ के पानी से करनैलगंज तहसील क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हो गए हैं। गोंडा जिले के 16 मजरों में पूरी तरह पानी भर गया है। वही एक दर्जन मजरों को पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है। 

जिले की सीमा से लगे गांवों ग्राम परसावल, नैपुरा, कमियार, किलवारी, मांझा रायपुर, लोढ़ेमऊ, अतरौली, बांसगांव दक्षिणी, पारा व बेहटा पूरी तरह बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। बाढ़ का पानी लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को सरयू नदी में खतरे के निशान 107.07 के सापेक्ष 80 सेंटीमीटर ऊपर हो गई और 4 लाख 67 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा था। वहीं करनैलगंज तहसील के ग्राम नकहरा में 16 मजरे बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूब चुके हैं। जिसमें राधेपुरवा, तीरथराम पुरवा, पुहिल पुरवा, बसंतलाल पुरवा, मोछारन पुरवा, दुलारे पुरवा, सम्भर पुरवा, छंगू लाल पुरवा, देव किसुन पुरवा, श्याम विहारी पुरवा, सहजराम पुरवा, तीर्थ पुरवा, भगत पुरवा व हरीलाल पुरवा सामिल हैं। अधिकांस घर पानी में डूब चुके हैं। 

घाघरा में आई बाढ़ का पानी ग्राम नकहरा के सबसे ऊंची सड़कों के ऊपर से बहना शुरू हो गया है और सड़क के ऊपर से पानी मैदानी इलाकों में आना शुरू हो गया है। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि बाढ़ का पानी करीब 2 किलोमीटर की एरिया में तेजी से फैल कर करीब एक दर्जन अन्य गांवों को बाढ़ की चपेट में ले सकता है। वहीं एल्गिन चरसडी बांध से सटकर लगातार पानी का तेज बहाव हो रहा है। जिससे बांध के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि इस मामले में बाढ़ खंड के अधिकारी बांध को सुरक्षित होना ही बता रहे हैं। मगर लगातार बढ़ रहे जलस्तर से बांध के लिए खतरा हो सकता है। दूसरी तरफ गोंडा जिले की सीमा पर बसे गांव में बाढ़ की स्थिति लगातार वीभत्स होती जा रही है। 

इन गांव की आबादी भी लगातार गांव से पलायन कर गोंडा जिले की सीमा पर आकर बस रही है। ग्राम मांझा रायपुर में लगातार आबादी वाले गांव पानी से घिरते जा रहे हैं और शुक्रवार सुबह तक करीब एक दर्जन मजरे बाढ़ से पूरी तरह घिर गए। गांव तक आने जाने का कोई रास्ता नहीं बचा है। हालांकि गांव में लोगों ने अपना सामान सुरक्षित कर बांध पर शरण ले ली है फिर भी इस गांव की अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना है। बाढ़ खण्ड के एई अमरेश सिंह कहते हैं कि बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नही है। पानी का डिस्चार्ज लगातार हो रहा है। उपजिलाधिकारी हीरालाल का कहना है कि सभी बाढ़ चौकियां एलर्ट हैं। राजस्व की टीम बाढ़ क्षेत्र में कैम्प कर रही है। लगातार बांध व बाढ़ पर निगरानी की जा रही है।