भारत के गांवों में पोषण सुरक्षा को मजबूती प्रदान करना

सार-संक्षेप

•      फॉर्च्यून सुपोषण प्रोजेक्ट के अंतर्गत 640 गांव शामिल हुए

भारत में 14 सीएसआर स्थानों पर पोषण माह 2021 मनाया गया

यह अदाणी फाउंडेशन द्वारा लागू किया गया, अदाणी विलमर का एक समुदाय-आधारित पोषण हस्तक्षेप प्रोजेक्ट है

सुपोषण संगिनी के नाम से पहचाने जाने वाले 400 से अधिक महिला सामुदायिक स्वयंसेवकोंने कई गतिविधियों का आयोजन किया, जिनमें उन्होंने पोषण संबंधी मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ायी

अहमदाबाद: अदाणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित पोषण कार्यक्रम से 12 भारतीय राज्यों के 640 से अधिक गांवों में 56,264 लोग लाभान्वित हुए। यह कार्यक्रम भारत सरकार के पोषण अभियान के अंतर्गत हर साल सितम्बर में मनाए जाने वाले पोषण माह के दौरान आयोजित किया गया।

अदाणी विल्मर की राष्ट्रव्यापी प्रोजेक्ट, फॉर्च्यून सुपोषण के तहत 400 से अधिक सामुदायिक स्वयंसेवकों की एक अखिल महिला अदाणी फाउंडेशन टीम, जिसे सुपोषण संगीनी कहा जाता है, भारत में 14 सीएसआर स्थानों पर लाभार्थियों तक पहुंची।

अगस्त 2021 में, महिला और बाल विकास मंत्रालय (एमडब्लूसीडी) ने घोषणा की थी कि इस साल का महीने भर चलने वाला कार्यक्रम 'थीमैटिक पोषण माह' होगा। सितम्बर के पूरे महीने में समग्र पोषण में सुधार की दिशा में एक केंद्रित और समेकित दृष्टिकोण के लिए साप्ताहिक विषय निर्धारित किए गए थे। फॉर्च्यून सुपोषण प्रोजेक्ट के तहत आयोजित गतिविधियां इन साप्ताहिक विषयों के अनुरूप थीं।

पोषण माह एक उपयुक्त समय पर हुआ जब कोविड की दूसरी लहर ने लोगों को तबाह कर दिया था, और जिसकी वजह से पोषण सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था, जिससे सभी स्तरों पर कुपोषण बढ़ गया। पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मानवशास्त्रीय माप जैसी आउटरीच गतिविधियां आयोजित की गईं। सभी 14 स्थानों परकुल मिलाकर, 7,699 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से 432 (5.6%) को गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) और 556 (7.2%) में मध्यम तीव्र कुपोषण (एमएएम) होने की पहचान की गई। इसके अलावा, स्वदेशी पौष्टिक व्यंजनों को बढ़ावा दिया गया और पोषण वाटिका (रसोई उद्यान) विकसित किए गए।

कोविड के मामले कम होने के साथ ही, फॉर्च्यून सुपोषण प्रोजेक्ट ने गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोर लड़कियों, पुरुषों, परिवार के सदस्यों और बच्चों की देखभाल करने वालों को शामिल करते हुए कई गतिविधियों के जरिये से सितम्बर के महीने के दौरान अपने समुदाय-आधारित नजरिये को तेज किया, ताकि अंतर-पीढ़ीगत  कुपोषण से निपटा जा सके। 

घरेलू स्तर पर 1,000 से अधिक पौधे लगाए गए, 575 पोषक उद्यान विकसित किए गए, टेक होम राशन (टीएचआर) और स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग करते हुए 463 खाना पकाने की व्यवस्था की गई, 2,630 गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं, 3,128 किशोर लड़कियों और एसएएम तथा एमएएम वाले बच्चों के 1,380 परिवारों7,138 परिवारों के लिए परामर्श सत्र आयोजित किए गए, 5,022 जल स्वच्छता और स्वच्छता (वॉश) प्रदर्शन आयोजित किए गए, और 5,782 लोगों के लिए 436 योग सत्र आयोजित किए गए।

अन्य गतिविधियों में सस्टेनेबल परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों के महत्व पर नारा लेखन, क्विज कार्यक्रम, स्वस्थ नुस्खा प्रतियोगिताएं और जागरूकता अभियान शामिल थे। महीने के दौरान सुपोषण संगिनियों के लिए कई क्षमता निर्माण सत्र भी आयोजित किए गए।

सुपोषण प्रोजेक्ट एनीमिया पर अंकुश लगाने और कुपोषण के अंतर-पीढ़ीगत चक्र पर ध्यान देने के साथ व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देती है। इसके लक्ष्य में यह शिशु (पांच वर्ष की आयु तक), किशोरियां, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं शामिल हैं।

एक बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शुरू से ही कुपोषण को रोकने के लिए सही स्तनपान तकनीक, देखभाल प्रथाओं, उम्र के अनुसार पूरक आहार और भोजन संबंधी आदतों को सीखने में माताओं की क्षमता को मजबूती प्रदान करना है।

अदाणी फाउंडेशन के बारे में

1996 में स्थापित, अदाणी फाउंडेशन 18 राज्यों में व्यापक परिचालन करता है, जिसमें देश भर के 2,410 गांव और कस्बे और प्रोफेशनल्स की एक टीम शामिल हैं, जिनका दृष्टिकोणइनोवेशन, जन भागीदारी और सहयोग का प्रतीक है।

3.67 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हुए और चार मुख्य क्षेत्रों - शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य, सतत आजीविका विकास और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए सामाजिक पूंजी बनाने की दिशा में काम करते हुए - अदाणी फाउंडेशन ग्रामीण और शहरी समुदायों के समावेशी विकास और सतत विकास की दिशा में कार्य करता है और इस तरह राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा है।