चार दिनों का मेला है तुझे अकेले जाना है

आयुक्त व आईजी ने किया मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण

त्याग दी दुनिया की जन्नत भी जिसके लिए 

उसके लिए भी प्यार का मोल कुछ भी नहीं 

क्यों गिला करता है ए दिल अपनों के आगे दुनिया में मोह्हबत का तोल कुछ भी नहीं 


चार दिनों का मेला है तुझे अकेले जाना है 

क्यों रोता है ए दिल गर तुझे न कोई जाना है 

कौन चलता है उम्र भर साथ मोह्हबत के 

दुनिया सिर्फ आँसूओं का रंगीन फ़साना है 


चले जायेंगे इक दिन हम भी इस जमाने से 

आज क्यों दूरियाँ तुम इस क़दर दिखाते हो 

सुख में तो चलती ही है दुनिया साथ सबके 

ये दुनिया नहीं ए दिल तेरा आशियाना है 


पुकारोगे किसी दिन तुम भी हमें रो रोकर 

फिर नहीं लौट कर हम तुमसे मिलने आएंगे 

आज जिंदा हैं यूँ हमें ठुकराना तुम्हें भाता है

बिता लो कुछ पल तो खुश होकर आज तुम लौटकर नहीं कल ये पल फिर कभी आयेंगें


वर्षा वार्ष्णेय 

अलीगढ़