बिटिया

फुलवारी परिवार की,

बेटी खिलता फूल।

बचपन से ही ध्यान दें,

शिक्षा दें अनुकूल।

बिटिया पर भी ध्यान दें, 

मान  उसे वरदान।

होता उससे ही सदा, 

दोनों कुल का मान।

शोभा घर की बेटियांँ, 

सुरभित इनके गान।

पढ़ -लिख कर बनती यही, 

हर घर का सम्मान।

बेटों से है कम नहीं, 

रखती सबका ध्यान।

बेटी को समझें सदा,

अपने पुत्र समान।

बाबुल की चिड़ियाँ यही,

कुछ दिन की महमान।

एक दिवस उड़ जायगी, 

रखना पूरा मान।

समय बड़ा प्रतिकूल है,

बिटिया देना ध्यान।

सीमा रेखा आपकी,

रहना मत अनजान।


वीनू शर्मा

जयपुर-राजस्थान