गोखाटोः खाओ और मौज करो

कल भजनखबरी के हाथ एक पैम्पलेट लगा। छपा था, क्या आप रोजगार हैं, क्या आप जिंदगी से खुश हैं? तो आप नीचे दिए मोबाइल नंबर पर फोन कर हमारे सुनहरे अवसर का लाभ बिल्कुल मत उठाइए। भजनखबरी को बड़ा अजीब लगा। भला कोई इस तरह का पैम्प्लेट छपवाता है। उसने दिए नंबर पर फोन लगाया। कहने लगा, अरे भाई! कोई रोजगारों के लिए पोस्टर बनाता है? पोस्टर तो हमारे जैसे बेरोजगारों के लिए बनाना चाहिए। सामने वाले ने कहा, भाई कुत्ता आदमी को काट ले तो सामान्य बात है, वही आदमी कुत्ते को काट ले तो यह विशेष। और आपको तो पता है कि आदमी किस तरह विशेष की ओर कैसे खींचा चला आता है। जो भी हो बताइए आप क्या चाहते हैं? भजनखबरी ने कहा, देखिए मैं बेरोजगार हूँ। मैंने डिग्री तक की पढ़ाई की है। इस डिग्री ने मेरे लायक कुछ किया नहीं। इसलिए यह मेरे लिए केवल कागज़ का टुकड़ा है। कुल मिलाकर घर वालों के सीने पर चढ़कर खाता हूँ। जब वे डाँटने लगते हैं तो तब बाहर की सैर पर निकल पड़ता हूँ।   

अरे वाह! हमें बिल्कुल आप जैसा आदमी चाहिए था। आखिरकार भगवान ने हमारी सुन ही ली। आप हमारे रिक्वायरमेंट के लिए फिट बैठते हैं, सामने वाले ने कहा। इस पर भजनखबरी ताज्जुब खाते हुए पूछने लगा, भाई साहब ऐसी कौनसी नौकरी है जिसमें हमारे जैसों को खाने और घूमने की तनख्वाह मिलती है? सामने वाले ने कहा, भाई हमारी कंपनी का नाम है, ‘गोखाटो’। ‘गो’ का मतलब जाओ, ‘खा’ मतलब खाओ और ‘आटो’ का मतलब अपने आप पैसा कमाओ। आपको मोबाइल पर ग्राहकों के ऑर्डर आयेंगे। आपको करना केवल इतना है कि ग्राहकों के मनपसंद वाले हाटलों से फुड ले जाकर उनके बताए पते पर समय रहते पहुँचाना है। यह सब काम करने के लिए गाड़ी हम देंगे। समझे! बस ध्यान इस बात रखना कि ग्राहक तुम्हें फाइव स्टार रेटिंग दे। ग्राहक खुश तो समझो तुम्हारी चांदी ही चांदी। भजनखबरी खुश हो उठा। किंतु चेहरे पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिह्न बना हुआ था। सामने वाला भजनखबरी से कहने लगा, मैं जानता हूँ तुम्हारे मन में क्या चल रहा है। यही न कि होटल से फुड सीधे ग्राहक तक पहुँचाओगे तो तुम्हें खाने को कैसे मिलेगा? यही सोच रहे हो न? इसके लिए यह हीट मशीन लो। कुछ कस्टमर कई सारे आइटम ऑर्डर करते हैं। तुम वह ऑर्डर लेकर कहीं रुक जाना उसमें से थोड़ा-थोड़ा निकालकर खा लेना। फिर उसे इस हीट मशीन से पहले की तरह पैक कर देना। काम का काम ऊपर से दाम।   

भजनखबरी ने अगले दिन ताबड़तोड़ डिलवरी की। खाने को भी बहुत कुछ मिला। उसने देखा कि दुनिया में उससे भी ज्यादा आलसी बैठे हैं। कुछ ग्राहकों ने तो चाय-समोसे का भी ऑर्डर लगाया था। जानते हैं वह ऑर्डर कहाँ का था? जहाँ से चाय और समोसा ले जाना था, उसी के बगल वाले अपार्टमेंट से। अब तो लोग अपार्टमेंट उतरने तक की जहमत नहीं उठाते। उठाए भी क्यों? चर्बी जो घट जाएगी! आखिरकार रात को भजनखबरी अपना भत्ता लेने पहुँचा। सामने वाले ने कहा, वाह तुम्हारी झोली में तो फाइव स्टारों की बरसात हुई है। यह लो दो सौ रुपए। भजनखबरी आँखें बड़ी करते हुए कहने लगा, सिर्फ दो सौ रुपअ? यह तो धोखा है। सामने वाले ने कहा, गाड़ी मेरी, खाना होटल का। तुमने दोनों का मजा उठाया। बाबू! मजा उठाने की कीमत नहीं लगाया करते। जो मिला उसी में खुश रहना सीखिए। मैंने भी किसी के सामने ऐसी ही कीमत लगाई थी। उसने धक्के मारकर हकाल दिया। किंतु तब तक मैं बहुत कुछ सीख चुका था। पिता ने लाखों का इन्वेस्टमेंट किया और मैंने खड़ी कर दी गोखाटो कंपनी। बरखुरदार आपकी हैसियत तो यह भी नहीं। आपके जैसे हजारों लल्लू-पंजू यहाँ आवारा घूमते-फिरते हैं। एक गया हजार आयेंगे। भजनखबरी को लगा, जो मिला उसी में खुश रहना सीखो। लक्ष्मी माथे पर तिलक करना चाहती है और वह माथा पोंछने की बात कर रहा है। उसने सामने वाले से माफी माँगी और अपने रास्ते चलता बना।   

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’, चरवाणीः 7386578657