करवा-चौथ की झलकियां

दिखती है करवा चौथ की झलकियां अक्टूबर और नवंबर में,

होती है सभी सुहागिने प्रफुल्लित इस व्रत के आगमन में।

है करवा चौथ का व्रत आया, सभी सुहागिनों ने उल्लास पूर्ण होकर है मनाया।

करवा चौथ की झलकियां बड़ी मन भावनी,

प्रातः चार बजे से शुरू और चांद निकलने पर ही खत्म होती है कहानी। 

सोलह श्रृंगार की साज-सामग्री चमकती हाट-बाजार के परिसर पर,

होती है बड़ी ही सजावट बाजार में इस व्रत के अवसर पर।

सोलह श्रृंगार धारण करने पर सुहागिनों की छटा पर चार चांद लगते हैं,

स्वयं चांद सी प्रतीत होती हैं सुहागिने,

जब वे अपने प्राणाधार के लिए सजती संवरती हैं।

करवा चौथ में सोलह श्रृंगार करना नारी सौंदर्य की परिपूर्णता है,

इसमें निखरती है औरत की सुंदरता है।

झिलमिलाते तारों के बीच में जब निकलता है दूधिया चंद्रमा,

देखती है सुहागिन छननी से,

उस चंद्रमा को और अपने प्राणधार को।

अकल्पनीय है वह वक्त और न ही की जा सकती है उसकी उपमा।

करवा चौथ के शुभ अवसर पर हम यही दुआ करते हैं, हर सुहागिन का सुहाग रहे सलामत,

और सभी दंपति वर्ग की जीवन में रहे प्रभु की इनायत।


                      नीता भारद्वाज"नीतु"

                    पांगणा उप-तहसील पांगणा 

                  जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश)