मीडिया समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम - सीएमओ

- सेंटर फार एडवोकेसी एण्ड रिसर्च के सहयोग से कार्यशाला आयोजित 

बांदा। स्वास्थ्य एवं पोषण संचार सुदृढ़ीकरण के लिए जिला स्वास्थ्य समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को सेंटर फार एडवोकेसी एण्ड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से मीडिया कार्यशाला आयोजित हुई द्य  कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के बारे में  विस्तार से जानकारी दी गयी । 

कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि अपर निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) डॉ.आरबी गौतम ने कहा कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के एक-एक अधिकारी-कर्मचारी ने जान-जोखिम में डालकर लोगों का उपचार किया। आज उसी का नतीजा है कि जनपद कोरोना मुक्त हो चुका है। अपर निदेशक ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जन्म से लेकर अंतिम समय तक व्यक्ति का बेहतर ख्याल रखने के लिए  विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहा है द्य विभाग गुणवत्तापरक सेवाएं दे रहा है। उन्होंने बताया कि कायाकल्प अवार्ड योजना में चित्रकूट और महोबा जैसे पिछड़े जनपदों का भी स्थान आने लगा है, अभी तक ऐसा नहीं होता था। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.वीके त्रिपाठी ने कहा कि मीडिया समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। पहले मातृ-शिशु मृत्यु दर अधिक हुआ करती थी। लोग तमाम तरह के अंधविश्वास से जकड़े हुए थे। प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात की देखभाल में भी तमाम कुरीतियां हावी थीं , लेकिन धीरे-धीरे इसमें बदलाव आया। मेडिकल साइंस ने भी तरक्की की और अब चीजें वैसे नहीं हैं, जैसी आज से 10-15 साल पूर्व हुआ करती थीं । ऐसा सब कुछ मीडिया के सक्रिय सहयोग से  हुआ। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कोई खिलवाड़ का विषय नहीं है, यह सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़ा है, इसलिए स्वास्थ्य के मुद्दे पर सजग होकर काम करना चाहिए। 

डिप्टी सीएमओ डॉ.एमसी पाल ने कहा कि सीफार ने मीडिया और विभाग के बीच काम करते हुए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में नया मुकाम  बनाया है। उन्होंने मीडिया की भी सराहना की। नियमित टीककरण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों पर  सभी प्रकार की गर्भवती की जांच की जाती है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया जाता है। महिलाओं और किशोरियों को एनीमिया से बचाव से प्रति जागरूक किया जा रहा है। 

डॉ.पाल ने कहा कि जनपद में लक्षित आबादी के मुकाबले 84 फीसदी लोगों को कोविड  के टीके लगाए जा चुके हैं। किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। हम धीरे-धरे शत-प्रतिशत आबादी को टीका लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल कर लेते हैं तो कोरोना की संभावित तीसरी लहर को आसानी से हरा पाने में सफल होंगे। उन्होंने बताया कि संभावित तीसरी लहर से निपटने के जनपद में सभी इंतजाम हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर  ऑक्सीजन की व्यवस्था है। क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के विषय में भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी और इससे बचाव के तरीके बताए। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य  योजना के नोडल अधिकारी डॉ.मनोज कौशिक ने बताया कि जनपद में इस योजना के तहत कुल 138516 परिवारों में 692580 लाभार्थी हैं। अब तक 162533 लोगों के आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं। योजना से आबद्ध 10 सरकारी और छह  प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को निः शुल्क उपचार मिल  रहा है। 

उन्होंने वेक्टर जनित रोगों के विषय में भी विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष 19632 रक्त पट्टिकाएं बनाई गई, जिसमें 13 में  मलेरिया की पुष्टि हुई है, 25 डेंगू के संभावित मरीज मिले हैं। मच्छरों की रोकथाम और निरोधात्मक कार्यवाही के लिए 1449 टीमें लगाई गई हैं।