जरूरत क्या है?

जरा सोचो...

नाम!

अगर चमकाया सकता है 

अच्छे काम करके भी तो फिर

छल-कपट से उसे कमाने की

जरूरत ही क्या है?


पैसा!

अगर कमाया जा सकता है

मेहनत मशक्कत करके भी तो फिर

बेईमानी से उसे कमाने की

जरूरत ही क्या है?


आनंद!

अगर पाया जा सकता है

किसी कला की साधना में भी तो फिर

व्यसनों में उसे ढूंढते जाने की

जरूरत ही क्या है?


प्रेम!

अगर पाया जा सकता है

समर्पण की राह पर चलकर भी तो फिर

झूठ बोलकर उसे हथियाने की

जरूरत ही क्या है?


                               जितेन्द्र 'कबीर'