मां का सजा दरबार स्थापित हुई प्रतिमाएं, मनचलों पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर

दुल्लहपुर/गाजीपुर। वर्षों पुरानी स्थापित परम्परा  के अनुसार आश्विन मास (शारदीय नवरात्र )के प्रथम दिन गुरुवार को क्षेत्र में कुछ जगहों पर मां दुर्गा पूजा समितियों द्वारा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सुसज्जित मंडपों पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन का कार्य प्रारंभ हो गया। शाम को मां दरबार की मनोहारी झांकी और आरती के साथ मंडपों में सिंहासन पर विराजमान आदि शक्ति स्वरूपा के दर्शन  के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती देखी गई। सबकुछ के बावजूद पिछले  साल से क्षेत्र में  मूर्ति निर्माण से लेकर मूर्ति स्थापना तक के बीच करीब महीने भर का  जाया होने वाला समय कोरोना और बढ़ती मंहगाई की भेंट चढ़ने के कारण हल्का दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में कुछ जगहों पर नवरात्र के अष्टमी के दिन रेडीमेड मूर्ति रखकर मुखपट खोले जाने की चर्चा है।  विदित है की स्थापित परम्परा के अनुसार ब्राह्मणों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण के बीच मां दुर्गा के आंखों पर बंधी पट्टी को खोलने का विधान है। जो निर्विघ्न संपादित होता रहा है। सिखड़ी दुल्लहपुर जलालाबाद,नायक डीह,बहलोलपुर  बड़ा गांव जफरपुर आदि जगहों पर भी मां की मनोहारी झांकी रखी जाती है। जहां दर्शकों की श्रद्धात्मक उपस्थिति दर्ज होती है। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से  पंडालों में जहां व्यक्तिगत वालंटियर भीड़ की कमान संभालते नजर आते हैं वहीं स्थानीय थाना पुलिस मुकम्मल तैनात रहती है। दुल्लहपुर थानाध्यक्ष शैलेश कुमार मिश्रा ने बताया की क्षेत्र में चौबीस स्थानों पर मूर्ति पंडालों में स्थापित की जानी है। सुरक्षा के बावत बताया कि झांकी दर्शन में भीड़ के मद्देनजर पुलिस लगातार चक्रमण करती रहेगी।अराजक तत्वों और मनचलों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। अराजक तत्वों से सख्ती से निबटने  में कोई कमी आड़े नहीं आएगी।हम खुद क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।