"पा लेना आकर्षण की मृत्यु है"

ताउम्र अपने भीतर जो भी चाह है उसे ज़िंदा रखना चाहिए। शायद हर किसीने कभी न कभी ये महसूस किया होगा की जो हम शिद्दत से चाहते है वह जरूर मिलता है, जरूर होता है।

Law of Attraction का सिद्धांत यह कहता है कि आप अपने जीवन में उस चीज को अवश्य आकर्षित करते है जिसके बारे में आप सोचते है। आपकी प्रबल सोच हकीक़त बनने का कोई ना  कोई रास्ता ढूँढ लेती है। इसलिए हंमेशा ऊँचा सोचो और सपने बड़े रखो। हर उस चीज़ के प्रति आकर्षण रखो जिसकी कामना आपका मन करता हो।

ज़िंदगी की साँसें आकर्षण की मोहताज है। बिलकुल जन्म से लेकर आख़री साँस तक हमें किसी न किसी चीज़ का आकर्षण रहता है, उसे पाने की बेतरबी ज़िंदगी को व्यस्त रखती है। जब तक कोई चीज़ लभ्य नहीं होती उसे पाने की प्यास हमें जद्दोजहद में रखती है। 

चाहे कोई भी चीज़ हो शाश्वत या नश्वर, मन के लिए वह चीज़ तब तक ही बेशकीमती होती है जब तक हम पा नहीं लेते। तुष्टिगुण का नियम हर चीज़ पर लागू होता है। प्रेम हो, कोई वस्तु हो या खाना, भूख मिटते ही जैसे खाना आम बन जाता है। वैसे ही कोई चीज़ पा लेने पर आकर्षण घट जाता है। हम सदैव उसकी तरफ आकर्षित होते है जो हमारे पास नहीं है। अगर उस चीज़ को पाना है तो शिद्दत से ज़िद्दी बनकर कामना करो।

"अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो  सारी कायनात उसे तुम से मिलाने में  लग जाती है" ये कथन महज़ एक फ़िल्म का डायलोग नहीं है। इसी को सिद्धांत के रूप में Law of Attraction कहा जाता है। ये वो सिद्धांत है जो कहता है कि आपकी सोच हकीकत बनती है।अगर आप सोचते हैं की आपके पास बहुत पैसा है तो सचमुच आपके पास बहुत पैसा सकता है, यदि आप सोचते हैं कि मैं हमेशा गरीबी में ही जीता रह जाऊंगा, तो ये भी सच हो जाता है।

शायद सुनने में अजीब लगे पर ये एक सार्वभौमिक सत्य है। यानि हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते है। मन का हारा हार जाता है, मन का जीता राजा बन सकता है। भगवान बुद्ध ने भी कहा है हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है। स्वामी विवेकानंद ने भी यही बात इन शब्दों में कही है। हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है। हमारे विचार बहुत दूर तक यात्रा करते जाते है, विचारों को बहने दो उस शक्ति की चौखट तक जहाँ से सकारात्मक प्रतिभावों का उद्भव होता है।

अप्राप्य चीज़ों को पाने का संघर्ष आपको ताउम्र व्यस्त रखेगा और पाने की शिद्दत हर उस चीज़ से मिला देगी तो आकर्षण को हंमेशा जवाँ रखिए।

भावना ठाकर 'भावु' बेंगुलूरु