हिंसा समाधान नहीं

हर तरफ हिंसा हर तरफ लड़ाई,

थे सब भाई-भाई आज बने कसाई।

याद करो जब हम अंग्रेजों के अधीन थे

पर भाईचारे के तख़्त पे आसीन थे।

एकजुट हो हमने देश को आज़ाद किया,

फिर बंट गये हम,जात-धर्म को आबाद किया।

चाहे हो किसान आंदोलन या हो कुछ और,

समाधान हिंसा से निकला नहीं है किसी दौर।

लेखों और आलेखों में हम छप रहे,

बना समाचार कागज़ पर हमें रच रहे।

मत भूलो वर्तमान आज हैं कल इतिहास हो जायेंगे,

आने वाली नस्लों को हम क्या मुँह दिखायेंगे?

जितनी पायी तरक्क़ी हमने उतने ही गिरे गर्त में,

फिर क्यों लाते हैं गौतम,नानक की वाणी तर्क में?

कलुषित कर संस्कृति अपनी विजय गान हम गाते हैं,

वसुधैव कुटुंबकम को दिल से नहीं

अपनाते हैं।

              रीमा सिन्हा(लखनऊ)