लखीमपुर का मामला खत्म, मृतक किसानों के परिवार संतुष्ट: टिकैत

भाजपा करवा रही है झगड़ा

लखनऊ। उत्त लखीमपुर खीरी में रविवार को प्रदर्शनकारी किसानों को गाड़ी से रौंदने के मामले में किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि मामला अब निपट चुका है। प्रशासन से हुई बातचीत से वो और पीड़ित किसानों के परिवार संतुष्ट हैं। किसानों को प्रशासनिक अफसरों के वादे पर भरोसा है। घटनास्थल पर सिर्फ टिकैत पहुंच सके, ऐसा क्यों? इस सवाल के जवाब में टिकैत ने बताया कि वो पुलिस नाका लगने से पहले ही लखीमपुर के लिए निकल चुके थे। 

उन्होंने बताया कि पीड़ित किसानों के परिवारवालों और प्रशासन से बातचीत कर रही किसानों की कमेटी के संतुष्ट होने पर ही मामला खत्म हुआ है। सरकार के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। जान गंवाने वाले किसानों के परिवार को 45-45 लाख रुपए, उनके परिवार के एक-एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी तथा घायलों को दस-दस लाख रुपए दिए जाएंगे। मंत्री अजय मिश्र और उसके बेटे के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है।

 पूरे मामले की न्यायिक जांच होगी। ऐसे मामले में सभी मुद्दों पर बात होती है। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सभी मांगों पर सहमति जताई है और इन्हें पूरा करने के लिए आठ दिन का समय मांगा है। फैसला लिखित में नहीं हुआ। मामले की एफआईआर दर्ज हो चुकी है। धारा 302 के साथ और भी कई धाराएं लगाई गई हैं। मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों को आर्थिक मदद दो से तीन दिन में उनके खातों में पहुंच जाएगी। 

न्यायिक जांच भी जल्द शुरू हो जाएगी। बड़े अधिकारियों से हुई बातचीत में फेरबदल की आशंका कम होती है । उन्होंने बताया कि घटना होते ही मैं गाजीपुर से लखीमपुर जाने के लिए निकल गया था। पुलिस नाके लगने से पहले से ही हम निकल चुके थे। मैं रात करीब 2 बजे बरेली पहुंचा तो वहां भारी संख्या में किसान भी पहुंच चुके थे। सरकार ने नेताओं की बजाय शायद किसानों को रास्ता देने की अनुमति दी हो।

 दस दिन पहले एक सभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र ने किसानों के खिलाफ बयान दिया था। किसानों में इससे नाराजगी थी, जब उन्हें पता चला कि मंत्री की सभा होने वाली है तो वो लखीमपुर के हेलीपैड पर पहुंच गए। मंत्री को सड़क के रास्ते कार्यक्रम में पहुंचना पड़ा। विरोध करने के बाद किसान वापस धरनास्थल पर जा रहे थे तो पीछे से मंत्री के बेटे ने अपनी गाड़ी से किसानों को कुचल दिया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई और दस किसान घायल हो गए। 

जब मंत्री के बेटे की गाड़ी किसानों को कुचल रही थी तो लोग उनके पीछे भागे। स्पीड तेज होने की वजह से गाड़ी पलट गई और उसमें आग लग गई।  केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के लोग और उनका बेटा किसानों को मारने के लिए गाड़ी लेकर आए तो किसान केवल विरोध कर रहे थे। सवाल यह है कि मंत्री का बेटा और उसके साथी किसानों के बीच गए क्यों थे? उन्होंने किसानों को मारा। इसके बाद किसानों से उनका झगड़ा भी हुआ।

 इस मामले में किसानों ने कई लोगों को पकड़कर पुलिस को सौंपा है। क्या वो बड़े लोग हैं, मंत्री हैं, उनकी सरकार है तो कुछ भी करवा सकते हैं? हम प्रशासन के अधिकारियों से संतुष्ट हैं, लेकिन मंत्री अपने बेटे को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। वो सरकार में हैं तो अपने पद का फायदा उठा रहे हैं। हमने यह भी मांग रखी थी कि मंत्री को बर्खास्त किया जाए, लेकिन प्रशासन ने कहा कि यह मामला उनके हाथ में नहीं है। 

मंत्री को पुलिस ने आपराधिक साजिश की धारा 120 बी में शामिल किया है। मंत्री के खिलाफ हम सारे सबूत जल्द ही पुलिस को सौंप देंगे। भाजपा नेता रणनीति के तहत लोगों के बीच झगड़ा करवाना चाहते हैं। सरकार भी किसानों से झगड़ा चाहती है। चाहे वो जातीय झगड़े हों या दूसरे मुद्दे। जब देश के गृह राज्यमंत्री और उनके परिवार के लोग ही ऐसा काम करेंगे तो आम लोगों को भगवान ही बचाएगा।