खूबसूरत

खुद से खुद को पहचान लो

हीरे की तरह तराशना है तो

दुनिया को एक काम दो।

बहुत मेहनत से यह दुनियाँ

ये काम भी कर जाएगी

सौ कमियां  जो हैं आपकी

आपको बता कर जाएगी।

किसी की तारीफ में दो शब्द

नहीं कह पाते हैं कमी ढूंढने का

ये मुश्किल काम आसानी से

कर जाते हैं।

और कुछ नहीं करना तुमको

बस कमियों को निगाह मे लाना है

छानकर अपनी कमियों को बस

खुद ही निखर जाना है।

कोई नहीं कहेगा यहां कि

तुम "खूबसूरत "हो खुद को

निखारो लो इतना  की तुम्हें

खुद "खूबसूरत" कहलाना है।

बड़ी खुदगर्ज है यह दुनियाँ

परिपूर्ण नहीं बनने देगी

एक अच्छे इंसान ही बन जाए हम

कौन सा हमें 'भगवान' कहलाना है।

सिर्फ खुद को खूबसूरत बनाना है।

सरिता प्रजापति