गांधी जीवन

एक लाठी पर झुका हुआ

दृढ़ इच्छा शक्ति गांधी है। 


सत्य को जीवन धन समझे 

मानो वो ही गांधी है। 


अन्याय, अत्याचार पर

जो भूखा बैठा वो गांधी है।


हमसब में छुप कर बैठा 

आज भी वो ही गांधी है।


दुख में कोई कराह रहा

तो दर्द तुम्हारा गांधी है।


परहित में लुट जाना ही 

भाव तुम्हारा गांधी है। 


हम सब में छुप कर बैठा 

आज भी वो ही गांधी है।


परहित जीवन जीने वाले 

का उपकार ही गांधी है। 


खड़ा अकेला चुनौतियों पर

निर्भय जीवन गांधी है। 


हम सब में छुपा हुआ 

प्रतिकार का नारा गांधी है। 


जिसने मन पर विजय किया 

वह पहला जीवन गांधी है। 


जिसने अन्याय,असत्य को 

दुत्कारा वह गांधी है। 


हम सब में छुपा हुआ 

आज भी वो ही गांधी है


आओ निज अंतर्मन में ढूंढे

छुपा हुआ जो गांधी है ।


फिर से असत्य की चिंगारी

जो सत्य बुझादे वो आंधी है। 


हम सब में छुपा हुआ 

आज भी वो ही गांधी है।।


अंजनी द्विवेदी

देवरिया ,उत्तर प्रदेश