प्रश्न- बासी बचे न कुत्ता खाए?

बांसी बचे न कुत्ता खाए

ये मुहावरा एक सोच दिलाए।।

क्यों फिर शादीशुदा का भी

वहशी कुत्ता हनन कर जाए।।


प्रश्न- बांसी बचे न कुत्ता खाए?

उत्तर- बांसी बचे कुत्ता ही खाए।


अपने घर की रोटी इन नीचों

का कभी ना भाए।।

दूजों की रोटी में आनंद ही

आनंद देख ग्रहण कर जाए।।


प्रश्न- बांसी बचे ना कुत्ता खाए?

उत्तर- बांसी बचे कुत्ता ही खाए।


घर में रोटी विधि सामाजिक रीति

 रीवाज से ला कर भरपेट है खाए।।

फिर भी बांसी खाने की रेड एरिया

में अकसर है जाए।।


प्रश्न- बांसी बचे कुत्ता ना खाए?

उत्तर- बांसी बचे कुत्ता ही खाए।


विवादित, गरम जोशी का ये सत्य

मुद्दा हर औरत के पक्ष को दर्शाए।।

बताओ ताजी रोटी हक की बोटी को

क्यों अपमानित कर बांसी हो खाए।।


प्रश्न- बांसी बचे कुत्ता ना खाए?

उत्तर- बांसी बचे कुत्ता ही खाए।


कलमकार की कलम चले जब 

जहर वो शब्दों में उगल ही जाए।।

खुद की गाथा या दूजों की व्यथा लिख

 अपना साहित्यकार दायित्व निभाए।।


प्रश्न- बांसी बचे कुत्ता ना खाए?

उत्तर- सच बांसी बचे कुत्ता ही खाए।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र