प्रेम अनुभूति

मेरा तेरे संग प्रेम मेरे सजना

यूँ ही जाते निभाना ता उम्र l


हम रहेंगे हमेशा ही तुम्हारे

तुम भी साथ निभाना दिलबर l


एक गाड़ी के दोनों पहिए हम

एक गया तो दूजा ना चल पायेगा l


गर विछड गए कहीं राहों में

जी ना सकेंगे कहीं भी फिजाओं में l


मेरी तुम संग लागी इस लगन को

कोई तोड़ ना पाएगा दिलवर l


मेरी प्रेम भरी इस कविता को

यूँ ही समझ ना लेना खाली है पत्र 


क्योंकि बहुत अधूरे से रहेंगे हम

तुम बिन , बस तुम बिन l


करमजीत कौर, शहर-मलोट

जिला-श्री मुक्तसर साहिब,पंजाब