हां मैंने सीखा है

हां मैंन  सीखा है,

जिंदगी से यूं ही हंसकर।

 गुजर जाना हां मैंन सीखा है,

  जिंदगी से प्यार बस प्यार करते जाना।

शर्मो हया के परदे में मुस्कुरानाष

 हां मैंने सीखा है अच्छी बातों पर अमल कर जाना‌

मैंने सीखा है जिंदगी से ,

उतार-चढ़ाव भरे दौर मेंअडिग खड़े रहना।

हां मैं नहीं सीखा है हिम्मत से ,

मुसीबतों का सामना करना।

हां मैंने सीखा है जिंदगी से ,

जिंदा दिली से जीना।

मिली है जिंदगी फकत एकही,

क्यों ना हंसते गुजारे हम‌

मैंने सीखा है जिंदगी से,

जीने की तमन्ना और मरने का खौफ क्या है।

पर चल आ ठहर जा जिंदगी,

 इम्तहान का दौर है।

मैंने सीखा है जिंदगी से हो इरादे फौलादी,

तब कहती  हूँ हार नहीं होगी ।

जिंदगी इम्तिहान का दौर है ,

खत्म इसकी बात ना होगी।

 मैंने सीखा है जिंदगी से ,

 धीरे से यूं ही मुस्कुराना।

  चला जाएगा गमों का दौर यह,

   धीरे से सब गुजर जाएगा।

   सब्र रख एक दिन वक्त तेरा आएगा,

   हौसलों की उड़ान से आसमां छू जाएगा।।

   हां मैंने सीखा है धैर्य सहनशीलता रखना।

                             रचनाकार ✍️

                             मधु अरोरा