रिश्ता

जीवन की बगिया रिश्तों की फुलवारी है,

हर रिश्ता अनमोल यहाँ,रिश्तों से ही दुनियादारी है।

प्रथम रिश्ता मात पिता संग,नेह की छाया से नम।

दूजा रिश्ता है भाई बहन का,साथ चलता जीवन पर्यंत।

गुरु का रिश्ता सब रिश्तों से है महान,

ज्ञान की ज्योत जला,देते विद्या का दान।

प्रियतम का साथ नयन और नीर के जैसा,

भावों का मेल यहाँ,क्षार मिश्रित सलिल के जैसा।

खून के रिश्तों से इतर भी कुछ रिश्ते होते हैं अपने,

सच्चा दोस्त जो मिल जाये तो पूरे होते हैं हर सपने।

जीवन की हर सच्चाई से वाकिफ़ मित्र हमारा होता है,

बेरंग सी जीवन का वो सुरभित इत्र होता है।

कुछ प्यारा रिश्ता है,प्रकृति और इंसान का,

कुछ पल बिताकर गोद में सुकून मिलता आसमान सा।

यूँ ही इक पावन रिश्ता कवि और कविता का,

दोनों इक दूजे के पूरक,ज्यों सागर और सरिता का।

समूह के रिश्ते से भी बँध गयी है हम सबकी डोर,

लेखनी को नई दिशा दिखाती, भागी आऊँ इस ओर।

जीवन का हर रिश्ता होता पावन और अनमोल,

सुमिरन से जोड़ा नाता जिसने वही समझे इसका मोल।

                      रीमा सिन्हा (लखनऊ)