स्वागत माँ का

शेर पर सवार होकर आई मेरी मां,

स्वागत में द्वार सजाया मेरी मां।

फूलों से सिंगार तेरा सजाऊंगी,

रोली कुमकुम महावर चढ़ाऊंगी।

ऊंची चौकी पर तुझको बिठाऊंगी,

गिरी छुआरे का भोग लगाऊंगी।

खुशियां अपार बनकर तू आजा,

जीवन में सुंदर बहार बन आजा।

दुख न रहे कोई अब तो यहांँ,

खुशियों की बहार बनकर आजा।

शेर पर सवार होकर आई मेरी माँ,

भूखे को भोजन खिलाने आई मेरी मांँ।

अमृत रस बरसाने आई मेरी मांँ,

दुखियों का दुख मिटाने आई मेरी मां।

नवदुर्गा रूप धर आई मेरी मां,

रूप अनेकों धार आई मेरी।

शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी कहलाई मेरी मांँ,

चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता ,

कात्यायनी बन आई मेरी माँ,

कालरात्रि महामाया सिद्धिदात्री बन आई मेरी।

जिसने जिस भाव से पूजा,

वैसा वर देने आई मेरी मां।

शेर पर सवार होकर आई मेरी मां,

सबके मन हरषाने आई मेरी मां।

                रचनाकार ✍️

                मधु अरोरा