राज्यपाल ने गुरु गोविंद सिंह द्वार एवं गुरु तेग बहादुर मार्ग का किया लोकार्पण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को लखनऊ में  गुरु गोविंद सिंह द्वार एवं गुरु तेग बहादुर मार्ग का लोकार्पण किया। भारती भवन राजेन्द्र नगर के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने सिख गुरुओं के कृतित्व पर प्रकाश डालने के साथ ही 18वीं शताब्दी के सिख-संघर्ष, शहादतें और सत्ता पुस्तक का विमोचन भी किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस कार्यक्रम में कहा कि गुरु तेग बहादुर एक क्रांतिकारी युगपुरुष थे। उन्होंने जुल्म और पाप का नाश करने का बीड़ा उठाया और मानवता को कुचलने वालों को सबक सिखाया। राज्यपाल ने कहा कि विश्व में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जैसा भारत में है। यहां पर सिख गुरू ने देश की और धर्म की रक्षा के लिए पूरे परिवार का बलिदान किया। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर महाराज और उनके पुत्र गुरु गोविंद सिंह और गुरु गोविंद सिंह जी और उनके पुत्र का बलिदान दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि सिख गुरुओं ने मानवता विरोधी कार्य करने वाले औरंगजेब को सबक सिखाया। इसके साथ ही समता, करुणा, त्याग और बलिदान एक अनूठी मिसाल पेश की।

गुरु तेग बहादुर जी के पुत्र गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी वाले दिन खालसा पंथ की स्थापना करने के साथ ही पाप का नाश करने के लिए बीड़ा उठाया। उन्होनें कौम को सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार किया। उनका जीवन अनुकरणीय है। इस अवसर पर महापौर संयुक्ता भाटिया ने गुरु तेग बहादुर के जीवन इतिहास पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विधि एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने सिखों के गुरुओं के त्याग और बलिदान को याद किया। इस दौरान आरएसएस के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर जी व क्षेत्र प्रचारक अनिल जी भी थे। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के पूर्व सुपरिटेंडेंट एवं यहियागंज गुरुद्वारा समिति अध्यक्ष डॉ गुरमीत सिंह, नाका गुरुद्वारा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बग्गा, प्रवक्ता सतपाल सिंह मीत, हरविंदर पाल सिंह, बृजेंद्र पाल सिंह, संपूर्ण सिंह, नवीन अरोड़ा, मनजीत सिंह तलवार, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परमिंदर सिंह, मनीष गुप्ता रजनीश गुप्ता गिरीश गुप्ता समेत पार्टी के बोर्ड के पदाधिकारी और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे।