पैगाम

तेरी याद इक पैगाम लाई है,

बैठे-बैठे सोचू तेरी याद आई है।

यादों के समंदर में आज बवंडर क्यों?

दिल में बस यही बात आई है,

बातें करें तुमसे एक जमाना हो गया।

फिर भी दिल की हर धड़कन तेरे नाम आई है,

आज भी सोचती हूं ,जब कुछ तेरी शरारत का।

चेहरे पर इक हय्या की लाली आई है।

तेरी यादें पैगाम लाई है,

खुशबू तेरी मीठी यादों के सहारे।

कड़वाहट धुल चुकी तेरे जाने के बाद,

 जिंदगी के सफर में तेरी याद आई है।

 क्या कहूं मेरे गुजरे,  कल का पैगाम लाई है।

 जाना तो नहीं चाहती मैं अब अतीत में,

 पर क्या करूं कमबख्त ,

 याद जहन से जाती नहीं।

 बस साया सा चले तू हरदम साथ मेरे,

 तेरी उस परवाह की बात याद आई है।

 तेरी याद एक पैगाम लाई है।

 दिल की हर धड़कन, 

 तरन्नुम का साज लाई है।

             रचनाकार ✍️

             मधु अरोरा