हरसिंगार की डार

मधु मुकुल के स्वर्णीम अवतार,

मृदु पल्लव जिसका है श्रृंगार,

अनोखा सौरभ,अनोखा मोहपाश,

मारुत से विभोर हरसिंगार की डार।

चुम्बकीय सम्मोहन है आधार,

स्निग्ध मनोहर कौमुदी का प्यार।

गिरकर करे रसा उल्लासित बार बार,

मारुत से विभोर हरसिंगार की डार...

उषा से लेकर चिर यौवन,

चंचल,पुलकित है चितवन।

मधुरिम,उन्मुक्त जिसका संसार,

मारुत से विभोर हरसिंगार की डार...

झुककर सदा जो देना जाने,

कोमल हृदय को जो पहचाने।

मधुप मकरंद का अभिनव प्यार,

मारुत से विभोर हरसिंगार की डार...

सजनी का गजरा महकाये,

कपोलों को आरक्त कर जाये।

श्वासों का बन जाये हार ,

मारुत से विभोर हरसिंगार की डार...

               रीमा सिन्हा (लखनऊ)