बापू आपकी की याद में

भूलकर आपके सिद्धान्तों को,

नित नये स्वांग रचाते हैं,

बापू आपकी याद में ,

गाँधी जयंती हम मनाते हैं...

मोल नहीं अब मानवता का,

भाई बना कसाई है,

सरेआम नोचकर बेटियों को,

मोमबत्ती हम जलाते हैं।

बापू आपकी याद में ,

गाँधी जयंती हम मनाते हैं...

जात धर्म में बँट गया सबकुछ,

हर पल दंगा और लड़ाई है,

भूल एकता को हम ,

मंदिर मस्ज़िद का शोर मचाते हैं।

बापू आपकी याद में ,

गाँधी जयंती हम मनाते हैं...

सादा जीवन छोड़ कर,

मृगतृष्णा की दौड़ लगी है,

इक दूजे को नीचा दिखाने में,

हर कोशिश आजमाते हैं।

बापू आपकी याद में,

गाँधी जयंती हम मनाते हैं...

बापू आपको फिर से आना होगा,

अराजकता को ठिकाने लगाना होगा,

आपसे नैतिकता का पाठ पढ़कर,

सत्यगामी सब बन जाते हैं,

बापू आपकी याद में,

गाँधी जयंती हम मनाते हैं...

                   रीमा सिन्हा (लखनऊ)