नयन मे नीर भर आये

हमें वो याद ज़ब आये, 

गगन में चाँद मुस्काया,

नयन में नीर भर आये,

गगन में चाँद मुसकाया!

जलन और लोभ की माटी 

न जनमे प्रेम का पौधा,

रिश्तो के है कई मुखड़े, 

गगन में चाँद मुसकाया!

धरम से जाति पर 

होते रहे झगड़े घरों में ही,

सरहदों पर डटे सैनिक,

गगन में चाँद मुसकाया!

बड़े दावे, कई सपने 

चुनावी दौर के उनके,

पहन कर ताज ज़ब आये,

गगन में चाँद मुसकाया!

चमकते चाँद सी दौलत , 

व झूठी रूप की रौनक़

बहुत एहसान इनपर है, 

गगन में चाँद मुस्काया!!

शहर में बस गये सारे,

पखेरू गाँव के मेरे,

दिखा वीरान वो बरगद, 

गगन में चाँद मुसकाया!!

चमकती चमचमाती 

बिजलियों से रात थी रौशन,

नजर में आप जो आये, 

गगन में चाँद मुसकाया!!


नीरजा बसंती,वरिष्ठ कवयित्री व 

शिक्षिका,गोरखपुर-उत्तर प्रदेश