॥ तन्हाई ॥

तन्हाई जब दस्तक दे जाती है

दिन रात हमें रूला जाती है

दिल बैचेन हो जाता है

पल पल तेरी याद सताती है


तन्हाई हमें जीने नहीं देती है

तेरी याद भी मरने कहाँ देती है

दो पाटों के बीच पीस जाता हूँ

गम की घूंट पी जाता हूँ


तेरी तस्वीर देख मन रोता है

तेरी हुस्न बैचेन कर जाता हूँ

तेरे आँचल प्यार की थी छाया

तेरी इश्क सुकून की है साया


हर आहट दिल धड़काता है

पदचाप सुनाई जब पड़ता है

तेरी पायल क्यूं गुमसुम है बैठी

कहाँ छुपी बैठी हो मृगनयनी


तेरी परछाईं में तेरी अक्स दीखता है

हवा तेरी बदन की खुशबू बिखेरती है

तेरी कंगना गाती है प्यार की सरगम

मन बैचेन हो जाता है मेरी सनम


अब और ना करा तुम इन्तजार

जुल्फों में छुपा लो हमें मेरे यार

सूरत अपनी दीदार हमें करा दो

प्यासा मन पर प्यार तुम बरसा दो


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका विहार