"धनवान की परिभाषा क्या है"

                                       
इंसान कितना भी अमीर क्यूँ न हो जाए तहज़ीब धैर्य और हर इंसान के प्रति सौहार्द भाव ये सारे गुण भीतर होने चाहिए और यही गुण आपकी छवि को निखारते है। साथ ही पैसा कमाने में इतना भी व्यस्त नहीं हो जाना चाहिए की बच्चों के जीवन की बागड़ोर आपके हाथ से छूट जाए और बच्चें गलत राह पर निकलकर अपना अहित कर ले। अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान भी देना चाहिए। 

बच्चों को पैसे की कद्र करना सीखाना चाहिए, जरूरतमंदों की मदद करना और सही चीज़ों पर खर्च करना सीखाना चाहिए। माँ-बाप का फ़र्ज़ बच्चों के प्रति पैसे देकर छूट जाना नहीं होता। पैसों का उपयोग बच्चें कहाँ कैसे और किस चीज़ पर करते है ये बात भी मायने रखती है।

एक उम्र के बाद कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जैसे कि बच्चों के दोस्त कौन है, कैसी संगत है, कहाँ जाते है, कितना वक्त पढ़ाई में देते है, कोई बुरी आदतों का शिकार तो नहीं और खासकर स्कूल कालेज में हर कुछ समय बाद पूछताछ करनी चाहिए, कि बच्चा रेग्युलर जाता है की नहीं वगैरह। ये जासूसी नहीं अभिभावकों का फ़र्ज़ होता है। कच्ची उम्र में बच्चों का मन गीली मिट्टी की तरह होता है अच्छे बुरे की समझ नहीं होती माँ बाप को ही ध्यान रखना चाहिए। 

जागरूक अभिभावक का उदाहरण देखें तो नीता अंबानी और मुकेश अंबानी का परिवार देश का सबसे अमीर घराना है पर बच्चों के संस्कार देखिए न कोई कांड न उद्धतता परिवार के सारें सदस्यों की शख़्सीयत से एक गरिमा छलकती नज़र आएगी।

कई बार देखा गया है नीता अंबानी हर छोटे बड़े इंसान से कितनी शालीनता से पेश आती है। फ़ोटोग्राफर से लेकर जितने भी लोग उनके इवेंट में आए होते है उनको पर्सनली पूछती रहती है, आपने खाना खाया, अच्छा लगा? ओके एंजॉय कीजिए वगैरह। और एक बोलीवुड की छोटी मोटी हीरोइनें दो फ़िल्म क्या कर ली खुद को महारानी समझती है। और फ़िल्म स्टार के बच्चे भी खुद को राजकुमार और राजकुमारी समझते किसीका भी अपमान करते झिझकते नहीं। 

माना आपके पास भरपूर पैसे और सुख सुविधाएं है, बच्चों का हक भी है खर्च करें, पर क्या ये सही है कि गलत रास्ता चुनकर जुआ, ड्रग्स, शराब और किसी भी नशे का सहारा लेकर समाज में गलत उदाहरण बिठाए। बच्चों और माँ-बाप के बीच एक सामंजस्य होना चाहिए, संवाद होना चाहिए और आपसी समझ होनी चाहिए। बच्चों के चेहरे की शिकन से माँ-बाप को अंदाज़ा लग जाना चाहिए की बच्चे के मन में क्या चल रहा है। इतनी नज़दीकियां होनी चाहिए की बच्चा हर छोटी-बड़ी बात अपने पेरेन्टस के साथ साझा करने में हिचकिचाए नहीं। बच्चों की कामयाबी पर शाबाशी देनी चाहिए और गलती पर प्यार से समझाना चाहिए और प्यार से न समझे तो हल्की सी सख़्ती बरतना गलत नहीं होता, आख़िर बच्चों की ज़िंदगी का सवाल होता है।

महज़ रुपये पैसे से आप धनवान नहीं कहलाते, मन भी उदार और धनवान होना चाहिए। साथ ही आपके बच्चों में भी संस्कार और सभ्यता होनी चाहिए ज़िंदगी जीने का सलिका होना चाहिए तभी समाज में अपना एक स्थान प्रस्थापित कर पाओगे। सबके दिल में जगह बना पाओगे। यही धनवान की परिभाषा है।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगुलूरु,कर्नाटक)