एएमयू में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 152वीं जयंती पर समारोह का आयोजन

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी द्वारा महात्मा गांधी जी की 152वें जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित एक आनलाइन समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि अहिंसा के पुजारी और और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने विश्व शांति के दूत के तौर पर पूरे विश्व पर जिस प्रकार का प्रभाव डाला उसका उदाहरण कहीं और नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से गहरा संबंध था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने कई बार अलीगढ़ का दौरा किया। एएमयू के मौलाना आजाद पुस्तकालय में उनकी यादों को संजोए कई पत्र और तस्वीरें सुरक्षित हैं।

 एएमयू छात्र संघ ने उन्हें 1920 में पहली आजीवन सदस्यता प्रदान की तथा महात्मा गांधी की अपील पर छात्रों ने स्वदेशी आंदोलन का प्रचार किया। कुलपति ने कहा कि महात्मा गांधी विश्व के महानतम नेताओं में से एक थे और उनके विचार और सिद्धांत समय की कसौटी पर सदा खरे उतरे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी से प्रेरित महान नेताओं और विचारकों की एक लंबी सूची है। उनमें से एक मार्टिन लूथर किंग जूनियर थे, जिन्होंने समानता और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने और अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए समान नागरिकता अधिकार हासिल करने के लिए सत्याग्रह के गांधीवादी सिद्धांत का प्रयोग किया था। 

प्रोफसर मंसूर ने कहा कि गरीबों, उत्पीड़ितों और निचली जाति के लोगों के लिए महात्मा गांधी की सहानुभूति बिल्कुल अद्वितीय है और वह अपने अदम्य साहस एवं कमजोरों के लिये किये गये कार्यों के लिये भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सम्मान के पात्र हैं। उनका प्रसिद्ध वचन है कि ‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है’ और यह वे कितने सरल रहते थे, यह अपने आप में एक आश्चर्यजनक अनुभूति थी। गांधी जी का जीवन उनके विचारों और कार्यों का एक आदर्श प्रतिबिंब था। उन्होंने कहा कि एक धर्मनिष्ठ हिंदू के रूप में गांधी जी का मानना था कि दूसरे के धर्म का सम्मानपूर्वक अध्ययन एक पवित्र कर्तव्य है और यह किसी के प्रति सम्मान को कम नहीं करता। 

उनका मानना था कि सभी महान धर्म मौलिक रूप से समान हैं और उनके लिए एक समान सम्मान और सहिष्णुता होनी चाहिए। धर्म पर गांधी जी के विचार और अन्य धर्मों के प्रति उनका दृष्टिकोण एक धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत के रूप में पूरे विश्व के लिये अनुकरणीय है। प्रोफेसर मंसूर ने बाद में राष्ट्र की स्वतंत्रता और अखंडता को संरक्षित और मजबूत करने के लिए समर्पण के साथ काम करने का आनलाइन शपथ दिलाई। उन्होंने ‘स्वच्छता शपथ’ में एएमयू शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का नेतृत्व करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने एक विकसित और स्वच्छ देश का सपना देखा था। 

इससे पूर्व कुलपति ने महात्मा गांधी के जीवन की सभी महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाने वाली दुर्लभ पुस्तकों, दस्तावेजों, पत्रिकाओं और संरक्षित तस्वीरों की आनलाइन प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। महात्मा गांधी की महानता पर बोलते हुए प्रोफेसर ए आर किदवई (निदेशक, यूजीसी एचआरडी सेंटर) ने कहा कि गांधी जी की शिक्षा हिंसा से बचने और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देती है। दुनिया भर के लोगों ने गांधीजी की शिक्षाओं से धैर्यवान, दयालु और ईमानदार रहना सीखा है। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा की वर्धा योजना (1937) जिसे नई तालीमध्बुनियादी तालीम के नाम से भी जाना जाता है, महात्मा गांधी की सोच का ही परिणाम थी। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का एक प्रभावी साधन माना और भारत में बुनियादी शिक्षा की योजना तैयार करने के लिए डा. जाकिर हुसैन की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की।

प्रोफेसर किदवई ने विस्तार से बताया कि यंग इंडिया के एक संस्करण में महात्मा गांधी ने लिखा था कि एएमयू के छात्र राष्ट्रीय आंदोलन को आगे बढ़ा सकते हैं और उनके माता-पिता को उनकी अग्रिम शिक्षा के लिए एएमयू को चुनने के लिए बधाई दी। प्रोफेसर रमेश चंद (अध्यक्ष, हिंदी विभाग) ने बताया कि गांधीवाद ‘सादा जीवन और उच्च विचार’ की मूल धारणा से प्रारंभ होता है और इसका उद्देश्य व्यक्ति और समाज को बदलना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया आज जिस अशांति से जूझ रही है, जीवन के विभिन्न पहलुओं में गांधीवादी दर्शन को जीवन में आत्मसात करना अनिवार्य है। 

गांधीजी के राजनीतिक योगदान ने हमें स्वतंत्रता प्रदान की और उनकी विचारधाराओं ने दुनिया को प्रबुद्ध किया। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में एक सुखी, समृद्ध, स्वस्थ, सामंजस्यपूर्ण और टिकाऊ भविष्य के लिए प्रमुख गांधीवादी शिक्षाओं का पालन करना चाहिए। प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि गांधी जी की शिक्षाओं ने न केवल ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिलाई, बल्कि समाज के सभी वर्गों को सम्मान दिलाया।

 एएमयू के छात्र यासिर अली खान (पीएचडी) और छात्रा शरमीन (बीए आनर्स) ने गांधी जयंती के परिदृश्य में अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि किस प्रकार महात्मा गांधी ने अहिंसा के माध्यम से सभी समस्याओं के समाधान के लिए काम किया और कैसे अहिंसा पर आधारित उनके विचार आज भी प्रासांगिक हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर एफ एस शीरानी (डीन, यूनानी चिकित्सा संकाय) ने किया और प्रोफेसर निशात फातिमा (विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष) ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। एएमयू के कार्यवाहक रजिस्ट्रार एस एम सुरूर अतहर ने भी आनलाइन समारोह में भाग लिया।