संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन - भारत की 135 करोड़ जनसंख्या के लिए जैव विविधता का एकीकृत ताना-बाना कोविड-19 रिकवरी और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति में ज़रूरी

गोंदिया - कुदरत द्वारा बनाई सृष्टि की खुबसूरत रचना जिसमें मानव सहित 84 करोड योनियां बड़ी खुबसूरती से प्रकृति की गोद में समाहित है। हर योनि अपने अपने स्तर पर जीवन व्यतीत कर रही है, यही करिश्माई खुदाई हकीक़त है साथियों आध्यात्मिक साहित्य में सृष्टि में मानव योनियों को सबसे बुद्धिजीवी योनि माना गया है, जिस पर सृष्टि की खुबसूरती की रक्षा करने का परम कर्तव्य निभाने की अदृश्य जवाबदारी है। परंतु कुछ दशकों से हम देख रहे हैं कि परम बुद्धिजीवी मानव द्वारा प्रकृति से बहुत छेड़छाड़ के स्वांग किए जा रहे हैं। पशु पक्षियों, जानवरों की प्रजातियों को विलुप्त का की ओर पहुंचा रहे हैं, प्रकृति की मूल्यांकित संपदा का अवैध ख़नन कर प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसमें प्रकृति की ढांचागत जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचाने का काम जाने-अनजाने में हो रहा है जो वर्तमान स्वस्थ मानव समाज के लिए भयंकर प्रलय दायक तो होगा ही,बल्कि हमारी भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी हम गुनाहगार होंगे। क्योंकि जैविक विविधिता को नुकसान से कुदरत द्वारा बनाई गई सृष्टि की रचना बिगड़ेगी जिसका विपरीत प्रभाव मानव योनियों को भुगतना होगा, इसलिए हमें आजादी की 75 वीं अमृत महोत्सव जयंती पर यह संकल्प लेना है कि हम जैविक विविधता बनाए रखने को महत्व देंगे और प्राकृतिक संसाधनों से अवैध अनैतिक छेड़छाड़, मानवीय योनि की बुद्धिमत्ता का अनैतिक उपयोग प्रकृति के खिलाफ नहीं करेंगे और किसी भी पशु पक्षी जानवर के जीवन सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाएंगे और ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे कुदरत द्वारा बनाई गई खुबसूरत प्रकृति की संरचना में व्यवधान पैदा हो इस तरह के तात्कालिक संकल्प लेने का समय आ गया है।...साथियों जैव विविधता को संरक्षण हेतु पूरा विश्व एकजुट है।इसलिए दिनांक 12 अक्टूबर 2021 को संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें भारत सहित अनेक देशों ने भाग लिया जिसका विषय था, जैव विविधता को सुधार की राह पर रखना।...साथियों बात अगर हम संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक सम्मेलन की करें तो पीआईबी के अनुसार केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने इस उच्च स्तरीय मंत्रियों के सत्र को संबोधित किया और कहा विकास के सभी अहम क्षेत्रों में जैव विविधता के विचार को मुख्यधारा में लाना और मानव कल्याण तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देना हमारी शासन के रणनीति के मुख्य मंत्र हैं उन्होंने, आइची जैव विविधता लक्ष्य पर बोलते हुए प्रतिनिधियों को सूचित किया कि भारत ने पहले ही अपने भौगोलिक क्षेत्र के 17.41 प्रतिशत से अधिक हिस्से को संरक्षण उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अलग रखा है और इस कवरेज को बढ़ाने के लिए और अधिक क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि भारत की हाल में डिजिटल रिपोर्टिंग ने आइची जैव विविधता लक्ष्य-11 और सतत विकास लक्ष्य-15 के तहत वैश्विक संरक्षण लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुझे 30 पहलों के द्वारा ग्लोबल 30 के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धताओं से अवगत कराते हुए बहुत खुशी हो रही है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देश के राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और अन्य वैधानिक एजेंसियों के साथ मिलकर संरक्षण, सतत उपयोग और निष्पक्ष व समान लाभ साझा करनेके उद्देश्यों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सरकारी और गैरसरकारी एजेंसियों के एक स्तरीय और केंद्रीय नेटवर्क के माध्यम से काम करता है।उन्होंने भारत की प्रतिबद्धताएं गिनाईं, (अ) प्रकृति के संरक्षण, इसके नुकसान की भरपाई करने के साथ ही हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ ग्रह सुरक्षित करने को सभी क्षेत्रों में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना। (ब) यह सुनिश्चित करना कि जैव विविधता संरक्षण का लाभ गरीब और संसाधन पर निर्भर समुदायों को मिले, जो जैव विविधता के सच्चे संरक्षक हैं और (स) प्रकृति, जलवायु और पशु, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य को एकीकृत करते हुए एक-स्वास्थ्य दृष्टिकोण' को हमारी कोविड-19 रिकवरी और आत्मनिर्भर भारत रणनीति के मूल में रखना है। उन्होंने कहा, हम भारत में हजारों वर्षों से प्रकृति का सम्मान करते और पूजते आ रहे हैं। दुनिया के केवल 2.4 प्रतिशत भूमि क्षेत्र के साथ, भारत में 8 प्रतिशत दर्ज प्रजातियों को आश्रय मिलता है और देश को खेती वाले पौधों की उत्पत्ति के 8 केंद्रों में से एक के रूप में पहचाना जातामें से एक के रूप में पहचाना है। वन्य फसलों से संबंधित कई सौ प्रजातियां पूरे देश में फैली हुई हैं। भारत की प्रतिबद्धता और प्रयासों पर बोलते हुए,कहा कि अपने जैव विविधता संरक्षण दायित्वों को पूरा करने के लिए भारत ने हमेशा सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों के नेटवर्क पर भरोसा जताया है। उन्होंने संरक्षण और विकास नीतियों के निर्बाध क्रियान्वयन के लिए हमारे कानूनों में नीतिगत सामंजस्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयास पर प्रकाश डाला और जोर दिया। हम इस मिशन में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए विभिन्न पक्षों के लिए अवसर पैदा होने की उम्मीद करते हैं जिसमें व्यापारिक पक्ष, कृषि, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों के हितधारक आदि शामिल हैं। जैव विविधता का एकीकृत ताना-बाना भारत की 1.35 अरब से अधिक मानव आबादी की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का अभिन्न अंग है, यह कहते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि देश की समृद्ध जैव विविधता एक दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है, और यह हमारे विविध सांस्कृतिक इतिहास का एक साझा सूत्र है। भारत दुनिया के 17 विशाल-जैव विविधता वाले देशों में से एक है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन भारत की 135 करोड़ जनसंख्या के लिए जैव विविधता का एकीकृत ताना-बाना कोविड-19 और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति में ज़रूरी है, तथा स्वस्थ मानव समाज को कायम रखने, प्रकृति जलवायु और पशु जैव विविधता का एकीकृत ताना-बाना कायम रखना अगली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।


-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र