GST के दायरे में नहीं आने से राहत की उम्मीद टूटी

अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की वजह से देश में पेट्रोल, डीजल की खुदरा कीमतों में और वृद्धि की आशंका सताने लगी है। अगस्त के शुरू में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इसी महीने के अंतिम सप्ताह से लगातार उछाल आना शुरू हो गया। ब्रेंट कच्चा तेल की वायदा कीमत शुक्रवार को मामूली गिरावट के साथ 75.02 डालर प्रति बैरल पर बोली गई।

जीएसटी काउंसिल की बैठक से आन लोगों की राहत की उम्मीद थी, लेकिन वहां भी मायूसी ही हाथ लगी। काउंसिल की 45वीं बैठक में पेट्रोल-डीजल पर चर्चा हुई, लेकिन इसके पक्ष में निर्णय नहीं लिया जा सका बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केरल हाई कोर्ट के आदेश पर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए आज के एजेंडे में  शामिल किया गया था। सदस्यों ने कहा कि इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने का यह उपयुक्त समय नहीं है और इसलिए इसके पक्ष में निर्णय नहीं हो सका। 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 12 दिन से कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर से तेजी आने लगी है।  ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां के मार्जिन पर दबाव बढ़ जाता है।  ऐसे में सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़े हुए स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि करनी होगी।