संतों के प्रति

भारत में संतों का मेला आता है

धर्म संस्कृति को आगे लाता है

संतों के बिना भारत कैसा होगा

मनुष्य बिना धरती जैसा होगा

सच्चे संत धन लोभी नहीं होते

इन्हें जीवन में साधन नहीं होते

संतों को सिर्फ सम्मान चाहिए

संतों को सिर्फ भूमि मान चाहिए

संतों के प्रति कर्तव्य जरुरी हैँ

संतों के प्रति भाव जरुरी हैँ

संत अपने लिए नहीं जीते हैँ

परोपकार के लिए वे जीते हैँ

इनके जीवन में निराशा कहाँ

इनके जीवन में बाधा कहाँ

जब भी संतों की उपेक्षा होगी

भारत की भूमि आहत होगी

जैसे सैनिक देश को बचाता है

वैसे संत भी धर्म को बचाता है

सच्चे संतों की वाणी अमृत है

सच्चे संतों की माटी अमृत है

गुरु शिष्य की गरिमा बनी रहे

देश की संस्कृति चमकती रहे

चाहे भारत डिजिटल हो जाए

बिन संतों के धर्म न टिक पाए

पूनम पाठक बदायूँ

इस्लामनगर बदायूँ उत्तर प्रदेश