मैं भी तो शबरी हूं

मैं भी तो शबरी हूं।यह बोलकर बहू चुप हो गई। दरअसल बात ही कुछ ऐसी हो गई थी बहू को ऐसा कहना पड़ा। सास नें सुबह ही कह दिया था कि बहू आज गणपति जी की विदाई है। दाल  बाटी चूरमा के लड्डू से गणपति जी की विदाई करना है। पति नें जैसे ही सुना दाल बाटी तुरंत बोल दिया टमाटर हरे धनिये की चटनी भी बना लेना तभी ससुरजी नें अपना पक्ष भी रख ही दिया और कहा बहू बाटी बहुत भारी हो जारी है हजम होने में दिक्कत देती है मेरे लिये तो चावल बना लेना। सास ससुर गणपति की पूजा करने में व्यस्त हैं वहीं पति देव भी मोबाइल में व्यस्त हैं और बहू रसोई में। रसोईघर और पूजा का कमरा आमने सामने है। सभी अपने-अपने कामों में लगे हैं फिर भी एक दूसरे से वार्तालाप जारी है। सास नें कहा बहू जरा शुद्ध घी तो देना भगवान के दिये में घी जरा कम लग रहा है। बहू नें कहा मम्मी जी आटा गूंथ कर देती हूं।ससुर जी नें कहा छोटी-छोटी चीजों के लिये बहू को आवाज मत दिया करो खुद उठ कर ले लिया करो।सास को पति की यह बात पसंद तो नहीं आयी लेकिन शांति रह गई। बहू को लगा सास को अपने बेटे से जो कि मोबाइल में बिना कारण व्यस्त है उससे घी मांगवाना चाहिये था और ससुर जी को भी सास को ना बोलते हुये अपने बेटे को बोलना चाहिये था। खैर अब तक बहू हाथ धोकर घी का डब्बा सास को दे चुकी थी। चार बर्नर वाली गैस पर एक बर्नर पर बाटी दूसरे पर दाल तीसरे पर चावल और चौथे बर्नर पर चूरमा के लड्डू में डालने के लिये सूखे मेवे घी में भूने जो रहे थे। हे भगवान चटनी भी बनानी है मैं तो भूल ही गई थी ।आज तो मेरी ही चटनी बन जाती।कहते हैं ना जल्दी का काम शैतान का काम ।जल्दी में याद ही नहीं रहा की दाल और चटनी में नमक डाला या भूल गई। पहले चटनी टेस्ट करी मिर्च कुछ ज्यादा लगी नमक तो बिल्कुल भी नहीं था।चलो थोड़ा नमक डाल देतीं हूं। नमक डाल कर फिर टेस्ट करा लगे हाथ दाल भी चम्मच में ले कर टेस्ट कर ली यह क्या इसमें भी नमक नहीं है। बहू नें नमक डाल कर फिर टेस्ट करा अब तक तसल्ली हो गई थी की नमक ठीक है। पूजा की सारी तैयारियां हो चुकी है अब भगवान के भोग की थाली आना बाकी है। सास अपने पति को कोहनी मार कर दिखा रही है कि देखों तुम्हारी लाडली बहू खाना झूठा कर रही है क्या यह भोग भगवान को लगेगा। अब तक बहू इस बात से बिल्कुल अंजान थी की उसकी टेस्टिंग प्रक्रिया पर घर वालों की नजर है। चूरमा के लड्डू बनाते समय भी ध्यान नहीं रहा शक्कर का बूरा सही मात्रा में डाला है या नहीं टेस्ट कर के देख ही लिया।और तसल्ली कर ली की चलो इसमें और मिठा मिलाने की आवश्यकता नहीं है। अब बहू नें गणपति जी के लिए भोग की थाली लगाना शुरू कर दिया। और थाली सजा कर जैसे ही सास को थाली देने पहुंची सास नें कहा बहू यह खाना तो झूठा है। भले ही तुमने अलग से निकाल कर टेस्ट करा है तब भी यह झूठा खाना ही कहलायेगा।हम जब भी भगवान का भोग तैयार करते हैं तब हम पहले टेस्ट करके नहीं देखते हैं। और रोज का भोजन भी टेस्ट करके नहीं देखते हैं। शुरू-शुरू में दिक्कत होती है लेकिन कुछ दिनों के प्रयास से ही हमारे द्वारा भोजन में डाले गये नमक एवं मसाले बिल्कुल सही अनुपात में डलने लगते हैं।और इस तरह से भोजन बनाने के मामले में हमारे आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।तभी ससुर जी बोले आजकल की पढ़ी लिखी लड़कियों का अधिकांश समय तो पढ़ाई में ही चला जाता है।इसलिये भोजन बनाने का अनुभव उन्हें कम ही होता है। तभी बहू नें कहा शबरी नें भी तो भगवान राम को झूठे बेर खिलाये थे मैंने अलग से चम्मच में लेकर टेस्ट करा है मम्मीजी पापाजी मुझे भी शबरी मान कर इसे प्रसाद स्वरूप स्विकार कर भगवान को अर्पित किजिये।भगवान तो हमारा भाव देखते हैं। तभी पति जो काफी देर से मोबाइल में विडियो देखने में व्यस्त था लेकिन बीच-बीच में सबकुछ देख सुन रहा था बोला शबरी की आड़ में चम्मच भर-भर कर इसने पहले ही खा लिया।तभी सास ससुर और बहू तीनों नें मिलकर कहा कल से तुम्हारे हाथ में मोबाइल नहीं बल्कि सब्जी काटते हुये चाकू और रोटी बनाते हुये बेलन दिखना चाहिये।पति को उसकी उम्मीद के विपरित ऐसा उत्तर सुनने को मिलेगा उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।अब आधुनिक शबरी रूपी बहू और सास-ससुर एकमत हो पति को मोबाइल से दूरी बनाने और रसोई के कार्यों में हाथ बटाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। घर की सुख शांति और खुशी के लिये परिवार का प्रत्येक सदस्य आधुनिक शबरी की भावना का सम्मान करते हुये उसे रसोई ही नहीं बल्कि घर के अन्य अनेक कार्यों में सहयोग प्रदान करें तब घर किसी मंदिर से कम नहीं।घर में मंदिर रखना और घर को मंदिर बनाना दोंनों अलग-अलग बात होते हुये दोंनों ही महत्वपूर्ण हैं।


रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार 

ramamedia15@gmail.com