पहली बार शिल्पी के शिल्पी को सम्मान

अयोध्या। प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष शिल्पियों को तराशने के काम में जुटे शिल्पी को सम्मान दिया है। पहली बार देश के दूसरे राष्ट्रपति शिक्षाविद सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जयंती पर शिक्षक दिवस समारोह के तहत प्रदेश के साथ जनपद के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में कार्यरत अनुदेशकों को अंग वस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। देश प्रदेश में कौशल के विकास के लिए सरकार की ओर से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का संचालन किया जा रहा है। प्रशिक्षण संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों के तहत कुशल कौशल के निर्माण के लिए युवाओं को अपने अपने क्षेत्र के कौशल की शिक्षा और प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में जनपद मुख्यालय के अतिरिक्त तहसील क्षेत्र सोहावल और मिल्कीपुर में प्रस्तावित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की कक्षाएं भी संचालित की जा रही है। सरकार के निर्णय के तहत पहली बार शिक्षक दिवस पर मंडलीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में भव्य समारोह का आयोजन कर विभिन्न पाठ्यक्रमों के अनुदेशकों को सम्मानित किया गया। लाला भाई जी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लेने वाले युवा अपने कौशल का प्रयोग रोजगार के साथ ही विभिन्न उद्योगों और संस्थाओं में निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण के हित में करते हैं। सम्मान समारोह के तहत नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता की ओर से उत्कृष्ट कार्य के लिए संयुक्त निदेशक अयोध्या मंडल डीके सिंह और प्रधानाचार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान अयोध्या के के लाल की मौजदगी में अनुदेशकों को अंग वस्त्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। ड्राफ्ट्समैन सिविल पाठ्यक्रम के अनुदेशक कश्यप कांत मिश्रा को भी सम्मानित किया गया। तापमान सिविल के अनुदेशक कश्यप कांत मिश्रा ने बताया कि अच्छा जानकार ही विकास की योजनाओं को साकार रूप देने और धरातल प्रदान करने के लिए ड्राइंग तैयार करता है। प्रशिक्षण संस्थान ऐसे युवाओं को योग्य बनने के लिए सभी कुशलताएं सिखाता है और समाज तथा राष्ट्र के बीच अच्छे कार्य की प्रेरणा लेकर जाने को तैयार करता है। उनका कार्य प्रशिक्षु युवा को देश और विश्व की वर्तमान चुनौतियों से मुकाबले के लिए ही तैयार नहीं करना है, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान ही प्रशिक्षकों वह सब कुछ दिखाना है जिससे वह राष्ट्र के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका का निर्वहन कर सके। जिससे रोजगार के साथ ही राष्ट्र की उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त हो सके। पहली बार सरकार ने अनुदेशकों को सम्मानित किया। यह सराहनीय कदम है।