उर्वी बहुत दुःखी रहती थी क्योंकि उसकी तीनों संतान बेटियां



 उर्वी बहुत दुःखी रहती थी। क्योंकि उसकी तीनों संतान बेटियां ही थीं।

       पूरे परिवार  के साथ-साथ पति भी उसे तिरस्कार पूर्ण नजरों से देखता था। कारण वह‌ पुत्र पैदा नहीं कर सकी।  
          परिवार में उसकी जिठानी की  खूब आव-भगत और इज्जत-मनुहार होती; क्योंकि उसको दो-दो बेटे थे। 
           धीरे-धीरे समय बीतता गया।  उसके जेठ के बच्चों के लिए पढ़ाई- लिखाई की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ खाने-पहनने की उत्तम  व्यवस्था हुआ करती थी।  
          पर उर्वी की  बेटियां उन्ही की पुरानी किताबों एवं बचा-खुचा खाकर पल-पढ़ रही थीं। उर्वी अपनी बच्चियों को जान से ज्यादा प्यार करती थी। 
        सबका तिरस्कार सहते हुए वह, उससे जितना बन पड़ता था अपनी बेटीयों के लिए करती थी।   
        वक्त के साथ-साथ बच्चे बड़े हो गये। उर्वी की बड़ी बेटी सृष्टि हाई स्कूल बोर्ड एग्जामिनेशन में पूरा प्रांत टॉप करती है। गांव में खुशहाली छा जाती है। गांव के प्रधान और गणमान्य लोग सृष्टि को शाबाशी देने के लिए उसके घर आते हैं। वे सृष्टि के दादा और पिता से बोलते हैं अब तो संकुचित सोच से बाहर आ जाओ, देखो, बेटी ने  पूरे गांव का नाम रौशन किया है। ये बेटियां गाँव का नाम रोशन करेगी।

● मधुलिका राय "मल्लिका"