नमन है तुमको बारम्बार

स्वप्नो को साकार करे जो, 

मा के आँचल सा दुलार 

नमन है तुमको बारम्बार ,

नमन है तुमको बारम्बार।

सतरंगी सपनो को, 

दे दिया सुंदर आकार 

अनुपम ग्यान की जोत 

जलाकर भर दिया मेरा भंडार।

ज्यों पूरनमासी चन्द्रिका 

भर दे सारा आकाश। 

जगमग जोत जली मन में, 

फैला चहुँ ओर प्रकाश।

धन्य हुआ यह मेरा नाम, 

जब लिया एक बार पुकार 

सरगम सी लगती बोली,

लूं एक बार निहार।

पल्लव है.इस तरू के 

जिसने दे डाला संस्कार

अनुराग तुम्हारा पाकर 

हम गायें राग मलहार।

संग तुम्हारे चलते चलते

हो गई माटी कुम्भ 

ज्यों राग के संग रागिनी 

हो जाय स्वयं प्रतिबिंब।

नमन है तुमको बारम्बार, 

नमन है तुमको बारम्बार।


वंदना यादव,वरिष्ठ कवयित्री व 

चित्रकूट-उत्तर प्रदेश 9453349583