खुश्बू

सविता की आंखों से आज नींद कोसों दूर भाग गई थी।सोने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन नींद का कहीं पर भी नामो निशान नही था।एक तो बेटे के  असमय जाने का दुख।ऊपर से जवान बहु और आठ महीने का पोता जिसको उसके पापा ने अभी तक देखा भी नही था।

कितना खुश था बेटा सुधीर ..जब उसको पापा बनने की खबर मिली थी ।लेकिन एक फौजी को इन खुशी और गम से ऊपर उठ कर पहले देश के लिए अपने फ़र्ज़ को निभाना पड़ता है। वो और उसके परिवार वाले उसकी छुट्टी मिलने की राह देख रहे थे कि तभी ये खबर आई कि सीमावर्ती देश के साथ सीमा पर हुई गोलीबारी में सुधीर शहीद हो गया। 

एक रिटायर्ड फौजी अफसर के लिए ये बेहद फख्र की बात थी कि उसके बेटे ने भी फ़ौज में जाने का फैसला किया ।लेकिन उसका इस तरह से असमय चले जाना पूरे परिवार को तोड़ गया। यही सब  बातें सोचते सोचते सविता ने सोचा कि सोने से पहले एक नज़र बच्चों को देख आऊं।

जाकर देखा तो बहु सुरभि एक तरफ बच्चे को अपने साथ चिपकाए सो रही थी और साथ में उसने अपने ऊपर सुधीर की वो जैकेट ओढ़ रखी थी जो उसको बेहद पसंद थी और उसने उस दिन भी पहन रखी थी जिसदिन वो आखिरी बार इस घर से रुख्सत हुआ था।

सुबह उठ कर सविता जब बहु के कमरे में गयी तो देखा अभी भी वो जैकेट वहां बेड पर ही पड़ी थी।

सविता ने बहु से बोला,"बेटा सुरभि,ये जैकेट मुझे दे दो मैं इसको धुलवाने भेज देती हूं और फिर सम्भाल कर रख दूंगी।"

बहु ,"नही मम्मी जी,ये जैकेट और सुधीर के बाकी पहने हुए कपड़े मैं ना तो कभी धुलवाऊंगी और ना ही उन्हें कभी भी यहां से हटाऊंगी क्योंकि मुझे उनके कपड़ों से हरदम उनकी खुश्बू महसूस होती है और उस खुशबू से मुझे उनके हमेशां मेरे आसपास होने का अहसास होता है।"

मौलिक एवं स्वरचित

रीटा मक्कड़