विनती करे बारम्बार

विनती करे बारम्बार 

यशोदा माँ ने सुनी पुकार

दरवाजे पर कोई बाबा है

विनती करे बारम्बार

माँ करा लाल का दर्शन

डरती है माँ देख बाबा

गले उसके सरपों की माला

कहा कितनी बार

सोया हुआ है लाल

रूप है ऐसा

डर जाए मेरा लाला

भिक्षा ले बाबा

दर से तू चला जा

बाबा माने न

माता की बात

माँ ले आ तू

बाहर अपना लाल

कितनी बार माँ

खाली ही आयी

पर बाबा ने तो

हठ ही लगायी

तू समझती है

जिसको लाला

वह तो है माता

जग का विधाता

मज़बूरी बनी

माँ अंदर को गयी

होले से माता

बाहर को आयी

लाला को अपने

बाहर लायी

बाबा तो वह

थे शिव बाबा

दर्शन किए अपार

माँ को दिया धन्यवाद

और चल दिए

अपने कैलाश

डरती हुई माता है

नज़र उतारे बार बार

यशोदा माँ ने सुनी पुकार

दरवाजे पर कोई बाबा है

रितु शर्मा