तीज

सुनो मैंने चांद की

पीठ पे कुछ लिखकर

छोड़ा है और

छोड़ आया हूँ

चांद की आंखों  में

अपनी दोनो आंखें

अपनी सभी उंगलियां

चांदनी को दे आया हूँ

इस पूरे चांद की रात

वो चांद मेरी आंखों से

जी भर देखेगा तुम्हे और

चांदनी मेरी उंगलियों से

तुम्हें प्यार करेंगी

तीज की रात

आना तुम छत पर

हरसिंगार सी सजी तुम

तीज की लालिमा बिखेरना।


डिम्पल राकेश तिवारी 

 अयोध्या-उत्तर प्रदेश